गीत/नवगीत

देश को तब मिली आजादी

आबाद होने को जब हुई बरबादी।
देश   को   तब  मिली  आजादी।।
दो   सौ   वर्षों  तक ,  देश   रहा   गुलाम।
छिनी शांति लोगों की , जीना हुआ हराम।
सन  संतावन  ने  जब   आग   लगा  दी ,
देश को….
माथे से पसीना टपका, खून गिरा सीने से।
मौत  तो  बेहतर है ,  घुट-घुट के जीने से।।
यह     बात     जब    सबने    फैला    दी ,
देश को….
कश्मीर से कन्याकुमारी , बंगाल से राजस्थान।
जंग छिड़ा देश भर , संकट  में  पड़ा सम्मान।।
बहनों    ने   जब   अपनी   मांग    मिटा   दी ,
देश को….
सोने की  चिड़िया  को  बचाने ,  गांधी-तिलक मिट गये।
विजयपथ के माला खातिर , कई जीवन धागे टूट गये।।
इंकलाब     का    स्वर     जब    हुआ    उन्मादी ,
देश को….

@ टीकेश्वर सिन्हा “गब्दीवाला”

टीकेश्वर सिन्हा "गब्दीवाला"

शिक्षक , शासकीय माध्यमिक शाला -- सुरडोंगर. जिला- बालोद (छ.ग.)491230 मोबाईल -- 9753269282.