लघुकथा

ये जो पब्लिक है

एक गाना है- ये जो पब्लिक हैं वह सब जानती हैं पर फिर भी ‘बेवकूफ’ बन जाती है क्योंकि वैलेंटाइन-वीक के बाद ‘एंटी-वैलेंटाइन वीक’ भी वे मनाने लग जाते हैं — कभी ‘स्लैप डे के रूप में तो कभीे ब्रेकअप-डे’ के रूप तक तक यानी प्यार पसंद नहीं आया तो छोड़ भी दे — इजहार करने के बाद वाले सप्ताह में ! ….और हिम्मत करके उसने भी इजहार कर दिहिस !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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