भजन/भावगीत

शिव स्मरण

(छंद-वाचिक श्येनिका, 21 21 21 21 21 2 )

नाग, धारि, काम आरि ओम हो
नील लोहित शिव अव्यग्र व्योम हो
नील कंठ अमरनाथ शरण दें
सोमनाथ आदिनाथ तरण दें
आशुतोष चारुविक्रम नाथ हो
वामदेव शूल पाणि तात हो
सर्वज्ञ जगत के गुरू पशुपति हो
सात्त्विक अष्टमूर्ति अमर यति हो
रूप कोटि-कोटि नाम अनन्त हैं
सदा शिवम पंचवक्त्र भनन्त हैं
महाकाल श्रीकण्ठ भक्तवत्सल हो
वामदेव गंगधारि सुफल हो
राम जपत शांत रहत शिव सदा
भस्मधारि त्रिपुर आरि शुभ सदा

— सुनीता द्विवेदी

परिचय - सुनीता द्विवेदी

होम मेकर हूं हिन्दी व आंग्ल विषय में परास्नातक हूं बी.एड हूं कविताएं लिखने का शौक है रहस्यवादी काव्य में दिलचस्पी है मुझे किताबें पढ़ना और घूमने का शौक है पिता का नाम : सुरेश कुमार शुक्ला जिला : कानपुर प्रदेश : उत्तर प्रदेश

Leave a Reply