मुक्तक/दोहा

मुक्तक

माना कि हुस्न तेरा कुछ लाजवाब है, कत्ल करने को नैन, छिपाने को हिजाब है,
हमको भी कमतर मगर न मानिये, हमारे पास इश्क में, कुछ खास जज्बात हैं|
तुम मारने की कुव्वत रखती हो, जानते हैं, खुद को बचाने का अपना अंदाज है,
बेवफा होते हैं कातिल, दस्तूर जमाने का, इसलिए कातिलों से दूर की मुलाकात है|
— अ कीर्ति वर्धन

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