कविता

आई लव यू की व्यापारी

 

हम तो पागल प्रेमी हैं, बस, पल-पल गाते प्रेम के गाने।
दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे ले ताने।।
प्रेम हैं हम, प्रेम पुजारी।
प्रेम सवार है, प्रेम सवारी।
प्रेम के बदले, ना कुछ पाना,
प्रेमी हैं हम, ना व्यापारी।
जहाँ रहो तुम, सुखी रहो बस, गा लेंगे हम, गीत पुराने।
दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे लेे ताने।।
चाहत तुमरी, तुम्हें मिल जाए।
तुम्हारे हर्ष में, जग हरषाए।
तुम्हें तुम्हारा प्रेम मिले तो,
हम, दोनों पर फूल बरसायें।
जाती हो, तुम जाओ प्यारी, प्रेमी संग गाओ, गीत सुहाने।
दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे लेे ताने।।
तुमने छला, ले कपट सहारा।
हमने तुम पर, था सब बारा।
हमको लूटा, लूट ले जाओ,
मिल जाए, तुम्हें, प्रेम तुम्हारा।
आई लव यू की व्यापारी, समझ न सकी, प्रेम के माने।
दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे लेे ताने।।
धन से ही है, प्रेम तुम्हारा।
धन की खातिर, हाथ हमारा।
प्रेमी को ठुकरा कर आईं,
धन ही कपटी, देव तुम्हारा।
प्रेम और विश्वास बिना, कभी, नहीं सुहाते प्रेम तराने।
दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे लेे ताने।।

परिचय - डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगंज, दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ियाँ, मेघालय-794106, ई-मेलः santoshgaurrashtrapremi@gmail.com, चलवार्ता 09996388169, rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in

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