गीतिका/ग़ज़ल

खिलौना

अनमोल है ये जीवन,  इसे खोना नहीं
सोचो अपनों के बारे, पड़े उन्हें रोना नहीं
गिनना अपनी खुशियां, अपने सुख को
याद रखो कभी दु:खों की माला पिरोना नहीं
जीवन की बगिया में खिले कई सुंदर फूल
इन्हीं से मन भरो, बस विलग होना नहीं
सभी यादें तो सुखदाई नहीं होती कभी
जो दु:ख देती हों ऐसी यादें संजोना नहीं
है कितने लोग, जिनको प्राणों से प्यारे तुम
उन्ही के लिए जियो, जीवन ये खिलौना नहीं
— प्रियंका अग्निहोत्री “गीत”

परिचय - प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत'

पुत्री श्रीमती पुष्पा अवस्थी

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