विविध

परीक्षा आयोगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम पत्र

माननीय प्रधानमंत्री सर,

सादर प्रणाम !

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में हिंदीभाषी अध्यक्ष या सदस्यगण होते हैं या नहीं, क्योंकि उनके हिंदी संबंधी अधिसूचना (नोटिफिकेशन) अंग्रेजी से अनूदित हिंदी में होते हैं, जो कि google से अनूदित हुए लगते हैं, जो कि समझ में भी नहीं आती है।

अधिसूचना (नोटिफिकेशन) ‘हिंदी’ में ही क्यों न लिखे जाते ? यह हिंदी को कमजोर करना है । ध्यातव्य है, भारत की 80% आबादी हिंदी को समझते हैं/जानते हैं!

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) जैसे संवैधानिक संस्थाओं के औचित्य पर पुनर्विचार हो, क्योंकि उन्होंने मेरे जैसे व्यक्ति के स्वर्णिम कैरियर को तबाह कर दिया !

सादर प्रेषित ।

सादर भवदीय- अपना ही।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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