लघुकथा

शेखर की दूसरी जीवनी

मेरी माँ पूजा-पाठ में ज्यादा ही ध्यान देती थी, उन्हें गृहस्थी से कोई मतलब नहीं, किंतु उनमें वात्सल्य ममत्व कूट-कूट कर भरी थी । मैं अज्ञेय का शेखर जरूर था, किन्तु मेरी माँ शेखरवाली माँ नहीं थी, किन्तु शेखर की शशि की भांति उनकी भी एक शशि थी । एक रात शशि दूसरे से शादी कर उनके घर चली गई ! मैं अवाक था ! बीस बरस हो गए, मैं तो अपनी इच्छा को दबा गया और किसी और कि तरफ नहीं देखा ! ….पर मेरी माँ अब भी शशि के इंतज़ार में है….. अब तो अब उनकी बिटिया भी बालिग हो गयी हैं, इसी साल 19 वर्ष बरस की हो गयी और वे भी प्रेम करने लगी है, प्रेमी का नाम शेखर है !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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