लेख सामाजिक स्वास्थ्य

सर्वसुलभ शौचालय

मलटंकी का सुलभ उपाय मिट्टी के पाट तो ज्यादा दिनों तक टिकाऊ नहीं रह पाते हैं । अगर शौचालय की मलटंकी मकान के नीचे कर दी जाय, तो मल भरने के बाद इन्हें खाली करने व कराने में व सफाई करने व करवाने में काफी दिक्कतें और अव्यवस्था आड़े आती हैं । वहीं दूसरी ओर जिनके यहाँ एकमात्र शौचालय है और परिवार के सभी सदस्य जॉब में हो, तो सुबह शीघ्र फ़ारिग होने के चक्कर में अंडरवियर में ही मल उतर आती हैं । यह मैं प्रैक्टिकल कह रहा हूँ, ऐसे में वैकल्पिक शौचालय की भी व्यवस्था हो यानी हर घर में कम से कम दो शौचालय तो होने ही चाहिए, फिर इसे बनाने के लिए सरकार को बाजार रेट के अनुसार अनुदान देने चाहिए । हाँ, बीपीएल को यह अनुदान मुफ़्त मिले ! हम खुले में शौच को ‘ना’ तो कहे ही, साथ ही दूसरे को भी ऐसा न करने को दें । इसके लिए परस्पर और पूरकीय सहयोग अपेक्षणीय है ।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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