भजन/भावगीत

सरस्वती वन्दना

हे माँ मुझको गीत दो ऐसा, जिसमें मधुर संगीत भरे हों।
अमिट हो वीणा की लय जिसमें, धुन कोयल से प्रीत भरे हों।।

तुम हो देवी ज्ञान की माता, तुम से ही ये वर्ण बने हैं।
शब्द, वाक्य, भाषाओं के सब, पोषित तुमसे पर्ण तने हैं।
कृपा तुम्हारी, गुरु, पितु के संग, इष्ट अक्षरातीत भरे हों-
हे माँ मुझको गीत दो ऐसा, जिसमें मधुर संगीत भरे हों।।

जड़-निर्जन में प्राण फूंक दो, कर दो लय-मय गीत हमारा।
तमस मिटा कर, भर दो ममता, जगमग कर दो जीवन सारा।
शोक, व्याधियाँ, कंटक वाले, ये जीवन अभिनीत परे हों-
हे माँ मुझको गीत दो ऐसा, जिसमें मधुर संगीत भरे हों।।

श्रद्धा, पूजा और अर्चना, विनति, याचना भाव प्रवाहित।
अरि कुदृष्टि की दृष्टि मेटने, वर्ण-वर्ण में काल समाहित।
ताल, छंद, यति, गति शब्दों, भावो में कालातीत भरे हों-
हे माँ मुझको गीत दो ऐसा, जिसमें मधुर संगीत भरे हों।।

Leave a Reply