राजनीति लेख

कांग्रेस-कांग्रेस स्वाहा !

कांग्रेस-कांग्रेस स्वाहा ! कांग्रेस के ऐतिहासिक ना-अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ही नहीं, आज़ादी से पहले लॉर्ड डफरिन ने भी कहा था– “काँग्रेस सिर्फ़ अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करती है ।” सिर्फ़ श्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, आज़ादी से पहले लॉर्ड कर्ज़न ने कहा था– “कांग्रेस अपने पतन की ओर लड़खड़ाती हुई बढ़ती चली जा रही है ।”

देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गीतकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने कहा था– “काँग्रेस के लोग पदों के भूखे हैं ।” योगी अरबिंदो घोष ने कहा था– “काँग्रेस क्षय रोग से मरने ही वाली है।” आज़ादी से पहले भी काँग्रेस वहीं पड़ी थी, जहाँ आज खड़ी है । गाँधी जी ने ठीक ही कहा था– “अब देश आजाद हो गया है, काँग्रेस को भंग व खत्म कर देना चाहिए ।”

मध्यप्रदेश में विधायकों के टूटने के बाद अब जिसतरह से राजस्थान में टूट हो चुकी है!

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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