भाषा-साहित्य लेख

हिंदी दलित आत्मकथा में पहला पी-एच डी.

हिंदी दलित आत्मकथा में Ph. D. प्राप्त करनेवाले पूरे भारत और हिंदी के पहले शोधार्थी हैं । मैं गौरवान्वित महसूस करता हूँ कि इस शोध-प्रबंध में मेरी भी चर्चा इसरूप में है—“सर्वथा अयोग्य सवर्ण सहकर्मी साम-दाम-दंड-भेद की जुगत भिड़ाकर नौकरी हथियाये , भी हम दलितों की प्रूव्ड प्रतिभा को स्वीकारना नहीं चाहता। अनधिकार नौकरी पाकर प्रतिभाशून्य सवर्ण भी अपने दर्प व जात्याभिमान के शिखर पर होता है । इस बात की गवाही बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवम् उदीयमान आलोचक-विचारक सदानंद पाल के ‘हंस’ के ‘सत्ता , विमर्श और दलित’ विशेषांक में छपे सारगर्भित स्वानुभूतिपरक आलेख ‘ मेहतरानी बहन और चमारिन प्रेमिका’ के बहुविध प्रसंगों से होती है। इस लेख में सदानंद ने हमारी आपसदारी की एक बात लिखी है,जो मेरी वर्तमान नौकरी का ही भोगा हुआ सच है — ”मेरे एक वरिष्ठ मित्र श्री मुसाफ़िर बैठा ने अपने सहकर्मी मिश्र जी को कहा कि आज एक महापुरुष की जयंती है, तो सुनकर मिश्रपात हुआ- ‘क्या सुबह-सुबह आप अम्बेडकरवा के बारे में कहने लगे ?”

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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