बाल कविता

शुकराने

रोज रात को को परिवार-संग,
करता प्रभु के शुकराने,
जिसने दी सब सुविधाएं,
खाने को अनगिन दाने.
होठों पर मुस्कान लिए मैं,
ताली खूब बजाता हूं,
बड़े प्रेम से धन्यवाद के,
गीत खुशी से गाता हूं.
मम्मी कहती सच पूछो तो,
यही है सच्ची पूजा,
मुस्काकर हरि-गुण गाने सम,
काम न प्यारा दूजा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

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