बोधकथा

बारिश में नहाने से बहते आँसू का पता नहीं !

‘मेरा नाम जोकर’ का जोकर की भूमिका में राज कपूर ने बिल्कुल ही चार्ली को जिया है। मेरा नाम जोकर में राजू की माँ मर जाती है और मृतका की देह घर पर पड़ी है, बावजूद वे सर्कस में लोगों को अपने अभिनय का छाप छोड़ रहे होते हैं। राज कपूर के पोते रणवीर कपूर ने इसे ‘बर्फी’ में जिया है । बॉलीवुड में अभिनेत्रियों ने भी चार्ली के अभिनय को जी हैं, यथा- मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी, तो अन्यार्थ फ़िल्म में विद्या बालन ! चार्ली का जीवन अभावों में बीता, द्रष्टव्यश: माँ-पिता के जीवित रहते भी अनाथालय गया, माँ-पिता को अलग होते देखा, सौतेली माँ की अत्याचार देखा, बाल्यावस्था में ही पिता की दर्दनाक मौत देखा, स्वयं की शादी भी टूटते देखा, कई मुक़द्दमें भी झेला, हिटलर की रूपाकृति पर धमकियाँ भी झेलें, आजन्म दुःख और उपहास पाया । तब कहीं जाकर वे चार्ली चैपलिन बन पाए ! उन्होंने खुद कहा है- “मुझे बारिश में भींगना अच्छा लगता है, क्योंकि कोई तब मेरे आंसू देख नहीं सकता है।”

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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