लघुकथा

वर्चुअल ब्लेसिंग्स

”नीलिमा की बेटी की शादी है जी, निमंत्रण पत्र आया है.” समीरा ने पति को संबोधित करते हुए कहा.

”चलना होगा या वर्चुअल ब्लेसिंग्स से काम चल जाएगा!” प्रश्न आया.

”लिखा तो यही है जी, कि आपकी उपस्थिति अनिवार्य है.”

”लाओ मुझे दे दो, तुम्हें तो बस बाहर चलने का बहाना दिखना चाहिए. बड़ी-बड़ी अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठियां भी वर्चुअल हो रही हैं, तो वर्चुअल ब्लेसिंग से काम क्यों नहीं चलेगा! सबको पता है कि कोरोना के कारण शारीरिक दूरी बनाए रखनी है, शगुन ऑनलाइन भेज देंगे. जानती तो हो कि शादी में 50 से ज्यादा लोग नहीं होने चाहिएं. इतने तो घराती-बराती ही हो जाएंगे.”

”इतना गहरा रिश्ता है, लोग क्या सोचेंगे?”

”रिश्ता गहरा हो या न हो, भरोसा गहरा होना चाहिए, मैडम.” समीरा से निमंत्रण पत्र लेते हुए पति ने कहा.

”ये देखो, कोने में स्पष्ट लिखा हुआ है-
‘घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए.’ काम की बात देखना भी सीख लो.” पति की आवाज में खीज थी.

”ऐसा करो, फोन मिलाकर नीरा को शादी और सुनहरे भविष्य की बधाई भी दे दो,  उसकी ममी से काम-काज और भी पूछ लो और ऑनलाइन शगुन भेजने के डिटेल्स भी ले लो.” तनिक विनम्र होकर पतिदेव बोले.

”क्या करें सखी! वर्चुअल ब्लेसिंग्स से ही काम चलाना पड़ेगा. समय के साथ चलना ठीक रहता है.” ऑनलाइन शगुन के डिटेल्स देते हुए नीरा की ममी के मन की उदासी छिप नहीं पाई थी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “वर्चुअल ब्लेसिंग्स

  1. सचमुच आजकल यही चलन हो गया है, जो समय को देखते हुए एकदम सही भी है. सबके बचाव में अपना बचाव है और अपने बचाव में सबका बचाव है.

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