गीत/नवगीत

कजरी (अवधी)

पांच अगस्त को अयोध्या में प्रभू श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा है। गांव की एक राम भक्तन ने अपनी सखी से कहा,” मंदिर तीन मंजिला का होगा, मतलब तीनो लोकों का प्रतीक। मंदिर में ३६६ खंभे होंगे जो वर्ष के हर दिन के प्रतीक हैं। पांच शिखर (गुंबद) पांच ज्ञानेंद्रियों के प्रतीक हैं। हर सीढ़ी सोलह फुट चौड़ी होगी, जो सोलह कलाओं से युक्त पूर्ण अवतार का द्योतक है। ऐसे धाम के दर्शन कर भक्त मोक्ष प्राप्त करते हैं। आज अयोध्या में तीन लोकों के देवी-देवता भेष बदलकर भव्य राम मंदिर निर्माण देखने आए हुए हैं। इसलिए हे सखी चलो हम भी भगवान राम और सीता के दर्शन कर आएं-
चला घूमि आई राम जी के धाम सखी,
बनिहैं सब काम सखी न।
सगरे देवी देवता अइहैं,
स्वर्ग अवध के बनिहैं,
राम नाम गूंजे जहवां सुबहोशाम सखी,
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी………….
राम लला धनुर्धारी,
हरिहैं पीर सब हमारी,
भक्त तरि जालें,लइके जेकरा नाम सखी,
बनिहैं सब काम सखी न,
चला घूमि आई राम जी………….
राम-लखन चारिउ भइया,
संग विरजिहैं सीता मइया,
भक्त पुण्यघट भरइं जहां अविराम सखी,
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी………….
फिनि से सरजू जी के घाट,
बढ़े राम जी क ठाट,
चलब चउदह कोसी बिनु किहे आराम सखी
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी………….
पांच शिखर बा समूचा,
इक सौ इकसठ फीट ऊंचा,
तीनि लोक, तीनि मंजिला बा धाम सखी
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी………….
साल में दिवस बा जेतना,
खंभा मंदिर में बा उतना,
भजन भाउ होई उहीं पे निष्काम सखी
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी………….
राम, लखन अउर सीता,
केउ क राखइं नाहीं रीता,
झोली सब क भरइं, जे भी जपइ नाम सखी
बनिहैं सब काम सखी न।
चला घूमि आई राम जी के धाम सखी
बनिहैं सब काम सखी न।
— सुरेश मिश्र

परिचय - सुरेश मिश्र

हास्य कवि

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