कविता

खो गए वो दिन

खो गए वो दिन

कहाँ से कहाँ आ गए हम,
खुद ही खो गए वो दिन

कहाँ से कहाँ आ गए हम,
खुद ही अपनों को खो दिया,

वो दिन खो गए कहीं जब,
हमारी दुनिया परिवार होते,

दोस्त होते थे सब कुछ हमारे,
खो गए वो दिन आधुनिकता में,

पड़ोसी पड़ोसी करीबी होते थे,
जान से भी प्यारे थे वो कभी,

आज कौन है पड़ोस में हमारे,
ध्यान नहीं किसी को भी,

तेरा मेरा होता नही था उस समय,
जब बच्चे संग संग खेलते थे ,

आज कहाँ गए वो दिन प्यारे,
खो गए वो दिन सुहाने से ,

रिश्ते सभी खो गए है देखो,
स्वार्थ पसर गया सब जगह ।

डॉ सारिका औदिच्य

*डॉ. सारिका रावल औदिच्य

पिता का नाम ---- विनोद कुमार रावल जन्म स्थान --- उदयपुर राजस्थान शिक्षा----- 1 M. A. समाजशास्त्र 2 मास्टर डिप्लोमा कोर्स आर्किटेक्चर और इंटेरीर डिजाइन। 3 डिप्लोमा वास्तु शास्त्र 4 वाचस्पति वास्तु शास्त्र में चल रही है। 5 लेखन मेरा शोकियाँ है कभी लिखती हूँ कभी नहीं । बहुत सी पत्रिका, पेपर , किताब में कहानी कविता को जगह मिल गई है ।