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लेयता नहीं, देयताभाव !

आप अच्छे कपड़े पहनते हैं, बीवी और बच्चों को भी महँगे कपड़े पहनाते हैं, महँगे होटलों में खाते हैं, सुरक्षा के लिए पिस्टल रखते हैं, बुलेट साइकिल, महँगे कार या विमान में चलते हैं, तो आप बड़े लोग हो गए, ऐसे-जैसे की सोच सिर्फ आप करते हैं ! मैं तो ऐसे लोगों को ‘गुंडा’ कहता हूँ ।

आपके चारों तरफ झुग्गी-झोपड़ी हो और आपकी एकमात्र  अट्टालिका वहाँ अहम से खड़ी हो, यह बड़ाई-जैसी कोई बात नहीं है, अपितु इनसे आपके विद्रूप चेहरा बाहर आ रहे होते हैं, क्योंकि बाहर मजदूरों की भांति रह रहे लोगों के बीच आप मक्खन की चटनी कैसे खा सकते हैं?

बड़े लोग वे हैं, जिनमें सेवापरायणता की भावना है; ‘लेयता’ नहीं, ‘देयता’ की भावना है । उनमें जरा भी अहंकार नहीं हो कि वे पैसेवाले व जमींदार हैं या उनकी संतान इंजीनियर, वैज्ञानिक, डॉक्टर, आईएएस अथवा ऊँचे ओहदे पर हैं !

क्या ऐसे बड़े लोगों से आपकी मुलाकात हुई है ? क्या ऐसे बड़े लोग आपके निकट हैं ? अगर नहीं है, तो कथित बड़े लोगों से आप दूर रहिये, वे आपके शुभचिंतक नहीं, शोषक हैं !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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