भाषा-साहित्य

संक्रमणकाल में साहित्यिक गतिविधियाँ

कोरोनाकाल एक संक्रमणकाल है, एतदर्थ इस संक्रमण के दौर में मन के अंदर आस्था और श्रद्धा निहित होनी चाहिए, न कि बाह्यपूजा !

यज्ञ प्रयोजन और भूमि पूजन अभी के समय में नहीं हो तो बेहतर है ! भूमिपूजन को लेकर आपकी सहमति आशावादी हो सकती है, किन्तु यथार्थवादी सोच लिए नहीं।

कोरोना से उबरने पर पूजा-अर्चना को देखें, तो श्रेयस्कर होगी।

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साहित्य कर्म और रंगकर्म को कैसे रोक सकते हैं ? सिनेमा में इंटरवल से पहले सच दिखाई जाती है।

इसे देखने का साहस रखिये ! जबतक हम घटना की वीभत्सता को नहीं समझेंगे, तब तक हम संवेदनशील कैसे हो सकते हैं ? हाँ, युवावर्ग घटना से उत्पन्न परिणाम से डरे !

क्या हम रावण या अन्य दुराचारियों के कुकृत्यकथा को माइनस कर ‘रामायण’ पढ़ेंगे, तो श्रीराम के किस सुकृत्य का अहसास हो पायेगा ! इसलिए राम-रावण यानी उभयपक्षों कि कथा को हम पढ़ते हैं !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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