पर्यावरण

सतपुड़ा ही क्यों घने जंगल ?

मेरे आँगन में 100 से भी अधिक प्रकार के पेड़, पौधे, पुष्प-पौध, लत्तियाँ हैं । ये सभी व्यवस्थित नहीं, बेतरतीब हैं, किन्तु पर्यावरण-संधि का ख्याल रखा गया है ।

सड़क से व दूर से जब मेरे घर को मित्र, प्रियजन अथवा परिजन जब देखते हैं, तो वे मुझे कोसते हैं और कहते हैं…. जंगल के बीच रहते हो ! गंदगियों के बीच रहते हो ! ‘सतपुड़ा का जंगल’ कविता आपने पढ़ा है! कीचड़युक्त वह जंगल है !

स्वच्छता का यह मतलब नहीं कि आप पेड़-पौधों को उखाड़ फेंको! जब घर में अनार, कटहल, अमरूद, चंदन, सिमल, गूलर, गमहार, नीम, नारियल, केला, तुलसी, हरवाकस, खजूर, संझा फूल, खमरालु इत्यादि को एकसाथ देखता हूँ, तो मेरा मन बाग-बाग हो जाता है !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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