सामाजिक

गौरांग महाप्रभु

गौरांग प्रभु के विचारों से प्रभावित होकर कीर्तनिया बन वापस अपने गाँव कई वाद्ययंत्रों और गायकों के साथ लौट रहे थे, बालक अटकू को यह भा गया और सीखने सीखाने की जिद कर बैठे. कई दिनों तक रियाज़ चला. किशोरवय तक 18 वाद्ययंत्रों से मेल कराने में पारंगतता हासिल कर लिये तथा चैतन्य महाप्रभु के कीर्तन संस्कार में सबसे युवा मूलगैन हो गए. बाद में अमृत पंडित ने अपनी पुत्री मैनी की शादी अटकू से कर दिए. कालान्तर में बांग्ला कीर्तन को अंगिका बोली में मिश्रितकर बाँग्लांगिका भाषा का ईजाद कर इसमें लोककीर्तन किया. संस्कृति लिए एक लोककीर्तन गीत का उदाहरण-
राजा पाखड़ जाकर नचबै रे, नचबै गयबै उछलबै रे, छेलै एक किशन कन्हैया, ओकर संगी चेतन भैया, मोरर पंख स खेलबै रे, बगिया म बहुत पाखर र गाछ, दुनिया क राजा छेके साँच, पूरब स पछिम जइबे रे, कि माखन चुरइबै, गोबर्धन उठइबै, राजा पाखड़ जाकर नाचबै रे, नाचबै गयबै उछलबै रे.

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.