कविता

घर से बाहर हुए हम

मास्क और दूरी,
अब भी जरूरी !
चाहे रिश्ते में कोई हो,
अन्यथा रोई हो,
खोई हो !
पत्रकार का मतलब
सिर्फ सवाल उठाना नहीं !
जनसरोकार से
जुड़े रहना भी है !

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आधी जुलाई खत्म हो गयी,
किन्तु ‘अनुभव’ अबतक अप्राप्त है !
अनुभव कबतक होगी ?
अपने-अपने स्वादानुसार !
आशा है, अपेक्षा है,
आप स्वस्थ और सुरक्षित होंगे !
विवेक, बुद्धि और कौशल लिए
संरक्षित और अखंडित होंगे !

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योग और घटाव के बाद भी
उनमें चतुरंग नहीं दिखा !
सिर्फ पुरापंथी लिए
शास्त्रीय के प्रासंगिक
गति कायम रही,
गतिविधि कायम रही !
यह गतिविधि ही
उस शख्स को महान बनाए !

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उनकी पीड़ा से अवगत कराइये,
उन्हें नए सिरे से स्वगत कराइये !
प्रकट कुछ भी नहीं !
है जो भी,
उसे अरिहंत कीजिए,
सुखाय स्वांत के स्वत:
है परिधित: !
प्रासंगिक और अप्रासंगिक !
यानी किक और गिक !

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बिहार बोर्ड में
इंटर में संस्कृत है कहाँ ?
शिक्षक भी नहीं !
हम दूसरे बोर्ड की बात
क्यों करें, मोहतरम !
यह गलत है,
जिनकी रोटी खाते हैं,
उनके साथ धोखा तो नहीं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.