कविता

मां की ममता

जब भ्रूण बनकर आया तू गर्भ में,
रक्त बनकर धमनियों में,
बह रही थी ममता।
जब तू शिशु बनकर आया गोद में,
दुग्ध बनकर स्तनों में,
बह रही थी ममता।
जब तेरी किलकारी गूंजती थी आंगन में,
होठों पर खुशी बन कर,
नाच रही थी ममता।
जब तू युवा हुआ,
और स्वयं को स्थापित किया,
गर्व वन के चेहरे से,
फूट रही थी ममता।
जब तू स्वयं के स्वार्थ बस,
मुझको छोड़ गया,
फिर भी आशीष बनकर कर,
हृदय में–
रो रही थी ममता।
— कामिनी मिश्रा

कामिनी मिश्रा

पिता का नाम- स्वर्गीय विजयकांत पांडे पति का नाम - श्री दीनबंधु मिश्रा वर्तमान / स्थायी पता प्लॉट नंबर 18 राजीव पुरम काकादेव कानपुर यूपी फोन नं.9695252037 जन्म तिथि -01/06/1976 शिक्षा -m.a. B.Ed व्यवसाय -प्रधान शिक्षिका बेसिक शिक्षा परिषद एवं (वरिष्ठ कवियत्री)