गीत/नवगीत

द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो

सत्तासीन नैन खो दे तो, दुःशासन बौरायेंगे।
द्रुपदसुताओ अस्त्र गहो ,अब केशव फिर न आयेंगे।

गर नर दनुज सरीखा हो तो, ममतामयी रूप छोड़ो।
बुरी नजर गर देखे कोई ,बाज बनो ,आँखे फोड़ो ।

कब तक दानव जैसे मानव ,तुमको जिंदा खायेंगे ?
द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो ……………………….

यह सोता समाज उठ बैठे,तुम ऐसी हुंकार करो ।
बहुत हुआ अब रणचंडी बन ,रक्त पियो, संहार करो ।

नहीं, दनुज हर ओर पाप के यह किस्से दुहरायेंगे।
द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो……………………

कब तक चीरहरण होगा ,तुम हर दिन मारी जाओगी?
नही बनी गर रणचंडी, चोपड़ में हारी जाओगी ।

कब तक नर अपनी तृष्णा में ,तुमको दाँव लगायेंगे?
द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो ……………………

गर मृगनयनी बनी रही तुम,हिंसक पशु खा जायेंगे।
बनी सुकोमल पुष्प सरिस तो,छलिया भौरें आयेंगे।

बनो हुतासन सरिस सभी निशचर निश्चय जल जायेंगे।
द्रुपदसुताओं अस्त्र गहो……………………

————© डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।

Leave a Reply