लघुकथा

सीख

डॉक्टर सरबजीत एक बड़े डॉक्टर माने जाते थे। दूर , दूर से मरीज़ उनके पास आते और ठीक हो जाते। मगर वो धीरे धीरे करके लालची हो गया था। लालची हो जाने का मतलब वो मरीजों से ज़्यादा फ़ीस लेते। और घमंड आ जाने की वजह से प्यार से बात भी नहीं करते। वहीं सरबजीत के एक  दोस्त  डॉक्टर गौरव काफ़ी प्यार से मरीज़ों को देखते और फ़ीस भी कम ही लेते थे। डॉक्टर गौरव के यहाँ अब मरीज़ों की लंबी लाईन लगने लगी । एक दिन डॉक्टर सरबजीत की माता ज़्यादा बीमार हों गयी। घर के बाक़ी लोग उनको लेकर उनके बेटे सरबजीत के अस्पताल जाने लगे तो माता जी ने मना कर दिया और बेटे के दोस्त डॉक्टर गौरव के अस्पताल में जाकर दिखाया। जब सरबजीत को ये बात पता चली तो उसको बहुत बुरा लगा कि मैं इतना बड़ा डॉक्टर हूँ ।और मेरी माँ किसी दूसरे को दिखाने गयीं। इस बात से वो काफ़ी दुःखी रहने लगा। माँ की नाराज़गी का उसपर गहरा असर हुआ। और उसने अपने को बदलने और ग़रीबों की मदद करने वाले डॉक्टर के रूप में बदलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उसके सब मरीज़ वापस आ गये। अब वो समझ चुका था कि माँ ने ऐसा क्यों किया था।
— आफरीन (कक्षा 5)

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