गीतिका/ग़ज़ल

किसी ने सच कहा है कि….

अपने नाम के खत को, दूसरों से पढ़ाए नहीं जाते !
हर किसी शख्स को, हमराज बनाए नहीं जाते !

किसी ने यह भी कहा है-

कितनी बार जला हूँ, कितनी बार बुझा हूँ?
कसूर यही मेरा, मैं मिट्टी का दीया हूँ !

पर हमने यही कहा है कि

अपने नाम के खत को, दूसरों से पढ़ाए नहीं जाते !
हर किसी शख्स को, हमराज बनाए नहीं जाते !

और-

कोई होठों से लगा लें, नींद आ जायेगी,
कोई कह दे ‘मैं हूँ ना’, ज़िन्दगी कट जाएगी!

फिर-

ये मिली ज़िन्दगी तन्हा, पे मिलकर काटिये,
मौत से अच्छा, दिल की तन्हाई झेल जाइये!

तब फिर-

नाम सागरमाथा है, एवरेस्ट का – यारों यहाँ!
पर एवरेस्ट का सागर से दोस्ती – सम्भव कहाँ?

और भी-

कुछ दिनों तक कह चले – हम साथ-साथ हैं,
पर कहते अब – हम आपके कौन हैं ?

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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