गीतिका/ग़ज़ल

सदाबहार काव्यालय: तीसरा संकलन- 14

चार ग़ज़लें
1.ग़ज़ल

सजदे में सिर खुदा के दिन औ’ रात रखते हो।
गुनाह करते हो मगर एहतियात रखते हो।।

वहशियत में तो दरिंदों को मात करते हो।
और उस पर फ़ख्र कि इंसानी ज़ात रखते हो।

कौन सा वक्त है जब चाल तुम नहीं चलते।
जेब में मोहरे बगल में बिसात रखते हो।।

माँ की दुआ, पिता की झिड़की संग-संग रहे।
ज़रा से घर में सारी कायनात रखते हो।

करते-करते भरोसा जी भला उकताए न क्यों?
लबों पे और, दिल में और बात रखते हो।।

बात बेबात ‘लहर’ कहकहे यूँ न बिखेरो।
मेरी तरह से तुम जर्जर हयात रखते हो।।
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सजदा= सिर झुकाना
एहतियात= ध्यान
कायनात= दुनिया
जर्जर= टूटी-फूटी, बिखरी हुई
हयात= ज़िन्दगी

2.ग़ज़ल

मरहम लिए बैठा रहा संग दाग पर देता रहा।
धुँआ था नापसन्द, आग शब सहर देता रहा।।

हर ओर खुशबुओं से भीगी बातें तर देता रहा।
ज़हर बुझे कुछ तीर पर अक्सर इधर देता रहा।।

पहले किया खाली उसे फिर छेद कर डाले कई।
थामा बड़े फिर प्यार से धुन और अधर देता रहा।।

उसका बड़प्पन आंकने को कोई पैमाना कहाँ?
दिल में गजब के फासले बिस्तर मगर देता रहा।।

धूप की डिबिया छुपा दी आसमानी रंग भी।
तिनका-तिनका हिस्से मेरे, साँझ भर देता रहा।।

चार दीवारी में थी हर चीज़ मयस्सर ‘लहर’।
छोड़ के जाने का बेज़ा एक डर देता रहा।।
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शब-सहर= शाम-सुबह
मय्यसर= प्राप्त
बेजा= बेकार का

3.ग़ज़ल

मन्नतों की ज़मी और चाहतों की बरसातें।
कुछ इस बरस यूँ हुई राहतों की बरसातें।

बाद मुद्दत के खड़की सांकल तो ये जाना।
बड़ा सुकूँ हैं लिए आहटों की बरसातें।

नहीं आएगा,फिर भी लगता है कि आएगा।
कहीं ज़िंदा है दिल में हसरतों की बरसातें।

सूखी है दिल की धरा कोई मरूथल जैसे।
सिर्फ तन पर है पड़ी रास्तों की बरसातें।

जीने देती हैं कहाँ इस कदर दूरी तुझसे।
मरने भी देती नहीं तेरे खतों की बरसातें।
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मन्नत= दुआ
हसरत= इच्छा
मरुथल= रेगिस्तान

4.ग़ज़ल

वादों पे एतबार कर बैठे।
घाटे का कारोबार कर बैठे।।

एक ज़रा सी हँसी के बदले में।
दिल-सी शै भी उधार कर बैठे।।

तेरे कहने पे बज़्म में आ कर।
बैठे, पर दिल को हार कर बैठे।

साँसों की धुन पे नाम को तेरे।
बेइरादा शुमार कर बैठे।

एक पूरब तो एक पश्चिम था।
हाय हम कैसे प्यार कर बैठे।

रूह को दर्द का पता तब हुआ।
तीर जब आर पार कर बैठे।
डॉ मीनाक्षी शर्मा”लहर”
ग़ाज़ियाबाद

एतबार= भरोसा
शै= चीज़
बज़्म= महफ़िल
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संक्षिप्त परिचय
नाम – डॉ मीनाक्षी शर्मा ‘लहर’
जन्म तिथि – 11/07/1975
शिक्षा – एम.कॉम., एम.एड., एम. फिल., पीएचडी (शिक्षा शास्त्र)
काव्य लेखन शैली – ग़ज़ल, गीत, कविता, बाल कविता, लघुकथा
काव्य सृजन -1995 से

रचना प्रकाशन -प्रेरणा, जयविजय , साहित्य समीर दस्तक, काव्य रंगोली, नारी शक्ति सागर पत्रिका समेत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में
प्रकाशित कृति – ग़ज़ल संग्रह – ‘अजनबी शहर’ ई बुक और पेपर बैक, वर्जिन साहित्यपीठ द्वारा प्रकाशित।
‘सृजन पथ पर’ काव्य संग्रह ई बुक तथा ‘कितना कुछ’ लघुकथा संग्रह इ बुक वर्जिन साहित्यपीठ द्वारा प्रकाशित।

सम्पर्क सूत्र – 2/106, सेक्टर -2, राजेंद्र नगर, साहिबाबाद, ग़ज़ियाबाद, उ.प्र.
ईमेल id – riddhisiddhi2508@gmail. com
फोन नं – 9716006178

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “सदाबहार काव्यालय: तीसरा संकलन- 14

  • लीला तिवानी

    प्रस्तुत हैं डॉ मीनाक्षी शर्मा की चार ग़ज़लें. डॉ मीनाक्षी शर्मा का तखल्लुस है ‘लहर’. लहर की भांति उनकी ग़ज़लें लहराती, बल खाती, कुछ-कुछ सिखाती चलती हैं.

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