स्वास्थ्य

स्वास्थ्य का बीमा – साप्ताहिक उपवास

प्रत्येक व्यक्ति और प्राणी को विश्राम की आवश्यकता होती है। प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में एक या दो बार छुट्टी दी जाती है। बाजार भी सप्ताह में एक दिन बन्द रहते हैं। यहाँ तक कि हमारे देवता भी चार महीने के लिए सो जाते हैं। बड़ी-बड़ी मशीनों को भी कुछ समय तक बन्द रखा जाता है। हमारा पाचन तंत्र भी एक मशीन है। उसे भी सप्ताह में एक बार आराम की आवश्यकता होती है। यह आराम हम साप्ताहिक उपवास द्वारा सरलता से दे सकते हैं। इसके लिए आप सप्ताह का कोई एक दिन अपनी सुविधा से तय कर सकते हैं। इस उपवास से हमारा पाचन तंत्र पुनः सबल हो जाता है।
साप्ताहिक उपवास कई प्रकार से किया जा सकता है। पूर्ण उपवास तो वह है कि आप सप्ताह में एक दिन केवल जल का सेवन करें, उसके अलावा कुछ नहीं। इस प्रकार जल पर उपवास करने से हमारे पाचन तंत्र को पूर्ण आराम मिल जाता है, जो बहुत मूल्यवान होता है। लेकिन ऐसा उपवास करने पर हमें कष्ट भी होता है, क्योंकि हमारा शरीर अपने नियमित समय पर भोजन माँगता है, जिसके अभाव में हमें कमजोरी आती है। इसलिए ऐसे उपवास की सलाह मैं प्रायः नहीं देता।
दूसरा विकल्प है- तरल पदार्थों पर रहना, इनमें फलों के ताजा जूस और सब्जियों के सूप पर ही रहा जाता है, अन्य सभी वस्त ुओं का पूर्ण निषेध होता है। उपवासी को दिन में चार बार चार-चार घंटे के अन्तराल पर लगभग एक पाव जूस या सूप पीना चाहिए और शेष समय हर घंटे पर सादा शीतल जल पीते रहना चाहिए। फलों का ताजा जूस न मिलने पर सब्जियों के सूप का उपयोग करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उसके अभाव में डिब्बा बंद जूस का सेवन किया जा सकता है। इसमें पूर्ण उपवास की तुलना में भूख का कष्ट कम होता है और लाभ लगभग पूरा मिल जाता है। मैं प्रायः ऐसे ही उपवास की सलाह सबको दिया करता हूँ।
तीसरा विकल्प है- फलों और सब्जियों पर रहना। इसमें अन्न और मिठाई आदि का पूरा निषेध होता है, केवल ताजा फलों और सब्जियों का सेवन किया जाता है। इसमें दिन में चार बार चार-चार घंटे के अन्तर पर एक पाव फल या सब्जी लिया जाता है। शेष समय हर घंटे पर सादा शीतल जल पीते रहना चाहिए। इस तरह के उपवास में भूख का कष्ट प्रायः बिल्कुल नहीं होता और पेट भरा-भरा सा लगता है। फलों का पाचन सरल होने के कारण पाचन तंत्र को बहुत आराम मिल जाता है। इसलिए साप्ताहिक उपवास का प्रारम्भ फलाहार से ही करना चाहिए। फलों और सब्जियों में कोई नमक आदि डालने की आवश्यकता नहीं है।
साप्ताहिक उपवास करने वालों की भूख प्रायः बढ़ जाती है और वे पूर्ण आहार करने लगते हैं। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि बाकी 6 दिन आप खाने-पीने में मनमानी करें। ऐसा करने से तो उपवास का लाभ बेकार हो जाता है। इसलिए शेष दिनों भी हमें सात्विक भोजन अपनी भूख के अनुसार सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र पर एकदम अधिक बोझ न पड़े।
साप्ताहिक उपवास हमारे स्वास्थ्य का बीमा है। इससे हमारा शरीर बहुत तेजी से पूर्ण स्वास्थ्य की ओर अग्रसर होता है। शरीर में छिपे हुए हानिकारक पदार्थ निकलने लग जाते हैं और उनके साथ ही बीमारियाँ गायब हो जाती हैं। इससे हमारी शुगर, बीपी और शरीर के अन्य सूचकांक सामान्य होते हैं। यदि आप पूर्ण स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो साप्ताहिक उपवास को अवश्य अपनाना चाहिए। साप्ताहिक उपवास के लाभ का अनुभव इसे स्वयं करके ही किया जा सकता है।
— डाॅ विजय कुमार सिंघल

परिचय - डाॅ विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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