धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

माँ गंगा

गुरुओं का सम्मान करें ! सनातन हिन्दू धर्मावलम्बियों के महान तीर्थ ‘गंगा स्नान’ की महत्ता कार्तिक पूर्णिमा के दिवा – रात्रि और भी बढ़ जाती है । आषाढ़ व शरद पूर्णिमा के दिन ‘वेदव्यास’ का जन्म हुआ था और इस पूर्णिमा को कालांतर में ‘गुरु’ पूर्णिमा कहा गया, किन्तु वेदव्यास के जन्म से पहले कार्तिक पूर्णिमा यानी अपनी ‘कतकी पूनो’ ही गुरु पूर्णिमा के रूप में अभिहित थी । वैसे कार्तिक माह भगवान महेश्वर शिव के ज्येष्ठ पुत्र ‘कार्तिक’ के इन अवधि में जन्म लेने के कारण पड़ा है।

वो जन्म अवधि कोई कार्तिक पूर्णिमा को मानते हैं अथवा बांग्ला संवत के अनुसार ‘संक्रांति’ को, जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष ’17’ तारीख को पड़ता है, माह प्रायः नवम्बर ही रहता है । ख़ैर, जो हो ! परंतु कार्तिक पूर्णिमा में गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु महेश्वर की अर्चना – पूजा की जाती है और इसके एतदर्थ ‘माँ गंगा’ की नदी में स्नान कर आस्था निवेदित करते हैं, श्रद्धा से त्रिदेव सत्ता में अपने को लीन कर देते हैं । मैं गंगा के अंतेवासी क्षेत्र मनिहारी में रहकर अपने को चिरनीत और गर्वान्वित माना है । ऐसे श्रद्धालुओं को सादर श्रद्धनाएँ!

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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