कविता

भावना अनाहत है

भावना अनाहत है,

क्यों फिर आहत है ?

यह नहीं मुसीबत है ।

आदत की कठिनाइयों में

विवाद कायम नहीं है,

यह जरायम नहीं,

अखण्डता है ।

द्वारा के द्वार पर अधीरता है ।

यह कैसी वितंडता है ?

दोस्त से पीड़ित होकर भी

कोई नहीं घायल है,

कहिये बंधु ।

हे मेरे बांधव !

आखिर क्या कोई बात है ?

अधीरता क्या जरूरी है ?

अन्यथा नहीं प्रहरी है ।

सावधान ! सावधान !

सावधान ! सावधान !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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