क्षणिका

अपना ‘दीपक’ खुद बनो !

कुम्हार-कृति लिए ज्योति-पर्व में उनके घर और दिल में जाकर भी दीप जलाएँ, जिनके घर और दिल में अबतक किसी प्रकार के रोशन नहीं हुए हैं…..

तभी आपकी दीपावली सफल और सुफल होगी…….

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दुश्मन को लगे हुकाहुकी की तित्ति,
यहाँ हाथ नहीं मिलते, दिल मिलना दूर है !
हाँ, दिल भी जले, दीप भी जले !
प्रदूषणरहित सुरक्षित दीवाली !

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अप्प दीपो भव:
[अपना दीपक व प्रकाश स्वयं बनो]
यह संत बुद्ध का कथन है।

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गोबर भी धन है, तो माँ का दूध के विकल्प हेतु गायों का विकास [गौ-वर्द्धन] जरूरी है !
ज्योतिपर्व जैसे इनमें भी वैज्ञानिकी है,
नमन…

 

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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