लघुकथा

रोल मॉडल

दिनेश अपने नाम के अनुरूप सूर्य की तरह तेजवान भी था. तन से भरपूर शक्ति का वारिस होने के कारण कुछ लोग उसे बाहुबली भी कहते थे. उसकी मन की शक्ति का भी कोई सानी नहीं था. काम की अधिकता होने पर भी वह न घबराता था, न ही जी चुराता था. जैसे कभी-कभी तेजपुञ्ज भास्कर को कारी बदरिया की कालिमा छिपा लेती है, दिनेश के साथ भी ऐसा ही कुछ-कुछ हो रहा था.

बहुतों की तरह कोरोना ने उसकी नौकरी भी छुड़ा दी थी. कुछ दिन तक तो पास की रकम से काम चल गया, लेकिन ऐसा कब तक चलता! उसने हिम्मत करके कुछ-कुछ काम शुरु किया. कभी ऑनलाइन खाना पहुंचाने, कभी दूध सप्लाइ करने, कभी फलों की रेहड़ी लगाने का काम भी उसने आजमाया, लेकिन बात बनती नहीं दिखाई दे रही थी. निराशा के घोर अंधकार ने उसकी तन-मन की शक्ति को ग्रहण लगा दिया. अनमनेपन के कारण अनचाहा कदम उठाने की बात भी उसके मन में सिर उठाने लगी. तभी उसके मोबाइल पर एक सुर्खी चमक उठी-

70 वर्षीय महिला को बचाने के लिए पुलिसकर्मी ने लगा दी कुएं में छलांग
उसने पढ़ना शुरू किया-

”आंध्र प्रदेश के कृष्णा डिस्ट्रिक्ट के गुदुर गांव में 70 वर्षीय महिला को बचाने के लिए पुलिसकर्मी ने लगा दी कुएं में छलांग. रात के लगभग 11:50 बजे कांस्टेबल ए शिव कुमार और श्याम रोज की तरह बीट पर थे. तभी उन्हें डायल 100 के जरिए सूचना मिली कि एक बुजुर्ग महिला अपने घर के कुएं में गिर गई है. हालांकि, स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुट चुकी थी लेकिन अंधेरे और कुएं की गहराई के कारण वे ज्यादा कुछ कर नहीं सके.” वह पढ़ता ही गया.

”शिव कुमार ने डूबती हुई सावित्री को देखा. जब उन्हें कोई सीढ़ी या रस्सी नहीं मिली तो शिव कुमार ने तुरंत कुएं में छलांग लगा दी और दादी को डूबने से बचाने के लिए अपनी गोद में बैलेंस किया. स्थानीय लोगों और कुमार के सहयोगी श्याम को रस्सी का इंतजाम करने में करीब 10 मिनट लगे, जिसकी सहायता से उन्होंने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. कोरोना के कारण सरकारी अस्पताल से तो सहायता नहीं मिल सकी, शिव कुमार ने पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर (आरएमपी) को बुलाया, जिन्होंने महिला को चिकित्सा सहायता प्रदान की.”

”डूबती हुई सावित्री को शिव कुमार बनकर भगवान ने बचा लिया, क्या भगवान मुझे नहीं बचाएंगे?” उसने अपने मन से सवाल किया.

”अवश्य बचाएंगे. तू हिम्मत न हार, खुद के लिए ही बन जा शिवकुमार.” उसके मन ने गवाही दी.

हिम्मत जुटाकर दिनेश ने अपनी व औरों की सहायता करने के संकल्प से उसने अपने तेज का आह्वान किया. शिव कुमार उसका रोल मॉडल बन गया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

3 thoughts on “रोल मॉडल

  1. कहानी प्रेरणादायक है। साधुवाद बहिन जी। यदि बच्चों को ऐसी कथायें पढ़ने को मिले तो वह समाज में उत्तम कार्यों को कर सकते हैं और निराशा को दूर कर सकते हैं। सादर।

    1. प्रिय मनमोहन भाई जी, रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन. यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ, कि हमेशा की तरह यह रचना, आपको बहुत अच्छी व प्रेरक लगी हमें भी आपकी ”’कहानी प्रेरणादायक है। साधुवाद बहिन जी। यदि बच्चों को ऐसी कथायें पढ़ने को मिले तो वह समाज में उत्तम कार्यों को कर सकते हैं और निराशा को दूर कर सकते हैं। ‘ के प्रेरक संदेश से सुसज्जित प्रोत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया लाजवाब लगी. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

  2. हिम्मत हारने से बात नहीं बनती, बात बनती है हिम्मत जुटाने से. उसके लिए शिव कुमार जैसे किसी को रोल मॉडल भी बनाया जा सकता है.

Leave a Reply