लघुकथा

तस्वीर

सुबह मास्क लगाकर सैर करते हुए अंकुर ने देखा, कि सूरी अंकल कपड़े के एक बड़े-से थैले से चिक्की के दो-दो पैकेट निकालकर सोसाइटी गार्डों को दे रहे थे और ‘धनतेरस शुभ हो’ कह रहे थे. फिर बाहर निकालकर रास्ते में मिले बच्चों के साथ भी ऐसे ही खुशियां बांट रहे थे. तभी उसे फेसबुक पर देखी एक मंत्री अंकल की पटाखे बांट रही फोटो की याद आई. यह वही मंत्री अंकल थे, जो कल ”राष्ट्रीय शिक्षा दिवस” पर ज्ञान बघार रहे थे-

”बच्चो, आज 11 नवंबर ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ है. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हमें स्कूली शिक्षा के महत्त्व के साथ-साथ यह भी सिखाता है, कि प्रदूषण और आतिशबाजी के धुएं के कारण पर्यावरण में धुंधलापन आ जाता है, जो हमारी आंखों और सेहत को हानि पहुंचाता है. इसलिए दीपावली पर आतिशबाजी न जलाएं.”

”अंकल इन दिनों तो हर साल प्रदूषण का यह कहर होता है, हमने सुना है यह पराली जलाने के कारण होता है. आप लोग कुछ उपाय क्यों नहीं करते?” एक बच्चे ने खड़े होकर मसूमियत से प्रश्न किया.

”यह भी बता दो कि क्या उपाय करें?” मंत्री जी ने मजे लेने के लिए कहा.

”हमने तो यह भी सुना है, पराली से बहुत बढ़िया खाद बन सकती है. आप लोग किसानों को सिखाइए भी और सुविधाएं भी दीजिए न!” बच्चे की राय थी.

”अब यह तो सरकार ही कर सकती है!” मंत्री जी खिसियाकर बोले.

”आप लोग सरकार नहीं हैं क्या?” बच्चे की बेबाकी और समझदारी से आयोजक भी हैरान थे.

”ठीक है, हम आपकी बात ऊपर तक पहुंचा देंगे.” मंत्री जी ने भाषण बंद करना ही उचित समझा.

 

जाते-जाते वे बच्चों को पहले से लाकर रखे हुए पटाखे बांटकर ”दिवाली मुबारक हो” कहते गए थे.

‘कथनी कुछ और करनी कुछ’ बताती मंत्री अंकल की वही पटाखे बांटने वाली तस्वीर वायरल हो गई थी.


चलते-चलते
यदि हम इसी तरह आतिशबाजी जलाने का जालेनवा खेल खेलते रहे तो ऐसी खबरें आम हो जाएंगी-
”दिल्ली में तेल की बारिश. सड़कों पर हुआ फिसलन. गाड़ी चलाना हुआ मुश्किल. Emergency कॉल लगातार मिलना शुरू”

दीपावली के बाद रविवार की शाम को दिल्ली में हुई बारिश के बाद सड़कों पर फिसलन बढ़ गई। लिहाजा बड़ी संख्या में लोगों ने तेल की बारिश की शिकायत दिल्ली अग्निशमन विभाग के पास की। बारिश के बाद करीब एक घंटे के अंदर विभाग के पास तेल की बारिश संबंधी 57 कॉल आई। दिल्ली अग्निशमन विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि ज्यातर कॉल मोटरसाइकिल चालकों ने की थी। माना जा रहा है कि बारिश के कारण वातारण में मौजूद धूल और अन्य रसायन पानी की बूंदों के साथ सड़कों पर आ गए होंगे। इसकी वजह से सड़कों पर फिसलन हो गई होगी।

दमकल विभाग के पास आग लगने की आई 205 कॉल

बता दें कि दिल्‍ली में सरकार की मनाही के बावजूद जमकर आतिशबाजी हुई। कई इलाके पटाखों की आवाज से गूंज उठे। आतिशबाजी में कई जगह आग लगने की घटना भी हुई। कुल आग लगने की घटना की बात करें तो 205 जगह आग लगी। हालांकि पिछली दीपावली के मुकाबले इस बार कम आग लगने की घटना हुई। कई लोग सरकार की मनाही के बाद सामाजिक जिम्‍मेदारी निभाते दिखे और लोगों को भी मना कर आतिशबाजी करने से रोका। वहीं कुछ जगह बच्‍चे आतिशबाजी जरूर करते दिखे। इस दौरान मुंडका में कूलर गोदाम में आग के अलावा कोई बड़ी घटना नहीं घटी। कूलर गोदाम में आग लगने से एक व्‍यक्‍ति की मौत हो गई जबकि एक शख्‍स झुलस गया। इसके अलावा ज्यादातर आग छोटी-मोटी ही रही।

और
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यह तो कोरोना काल का हाल है!

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “तस्वीर

  • लीला तिवानी

    कभी-कभी बच्चे भी बड़ों को बहुत कुछ सिखा जाते हैं. पराली जलाने के कारण इन दिनों हर साल प्रदूषण का यह कहर होता है, इसका कुछ उपाय तो करना ही होगा. किसानों को पराली के सदुपयोग के बारे में सिखाना होगा और सुविधाएं भी देनी होंगी. हां, यह काम केवल सरकार का नहीं है, हम सबका साझा कार्य है. सब मिलकर समस्या से निपट सकते हैं. कथनी और करनी के अंतर को पाटना होगा.

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