कविता

आंसू

आंसू जो टपका
मेरी आंख से
किसी ने समझा
कारण है किसी खुशी का
कोई समझा
कतरा है यह
गम का
सच तो यह था
कोई न समझा
आखिर क्यों यह छलका
बस मैं ही इसको समझा
क्यों यह छलका
कोई खुशी थी
यां कि कोई रंज