लघुकथा

बाबूजी

बाबूजी को तब से जान रहा हूँ, जब मैं कक्षा 3 या 4 का छात्र था ! वे हमारे यहाँ अक्सर आते थे, रात भी ठहरते थे, तब सिर्फ स्वजाति के विकास से संबंधित बातें ही होती, जिनमें मेरे दादाजी, उनके भाई नवीन दादा, कृष्णमोहन दादा, अयोध्या दादा, फणीभूषण दादा, चंद्रमोहन फूफा, मेरे चाचा इत्यादि रहते थे ! मैट्रिक आते-आते मैं बाबूजी के अर्जक विचारों से अनुप्राणित हुआ, तब शायद श्रद्धेय छेदी पंडित चाचा और श्री प्रणयी सर अध्यात्म के साथ-साथ इन विचारों से जुड़ रहे थे, इसी बीच देवेश जी और किशोर लेखनी के लंगोटिया यार बन गया…. एक दिन बाबूजी की उपस्थिति में ‘बाल दर्शन’ की प्रधान संपादिका श्रद्धेया मानवती आर्य्या से ‘अर्जक निवास’ पर मुलाकात, लंबी बातचीत भी हो पाई ! अर्जक निवास में बाबूजी के साथ रातें भी बिताई है और अंतिम यात्रा में भी साथ था…. यादें अमर रहेगी, बाबूजी ! आप तो उन यादों में रहेंगे ही !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

One thought on “बाबूजी

  1. आप ने यादों को सुंदर तरीके से सजाया है. यह भावों की बढ़िया बभिव्यक्ति है;

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