बोधकथा

निजता सिम्पली

ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो सफल और संपन्न होकर भी सिम्पलीसिटी में जीते हैं । यह तो बड़प्पन है । ….किन्तु  कम्युनिस्ट न सम्पन्न हुआ चाहते हैं, न सफल ! वह सिम्पलीसिटी में ही रहना चाहता है, जो कि गरीबी के फलस्वरूप है !

अगर क्षमता है, तो हम गरीब क्यों रहें और गरीबी में क्यों जीये? कहने का मकसद है, सम्पन्नता पाकर अगर हम सिम्पलीसिटी में रहे, तो यह हमारी महानता है, अन्यथा सम्पन्नता का डींग हाँकना हमारे अभिमान का सूचक है, जो कालांतर में दुर्बल पक्ष के रूप में अभिहित है।

गाँधी जी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर रखे थे, किन्तु ‘चश्मा’ लगाए रखे! कोई बतायेंगे, यह चश्मा ‘स्वदेशी’ था या ‘विदेशी’ ! अगर स्वदेशी था, तो कहाँ बना था? शिवम जी ! मेरा कहना समग्रता को लेकर है! अगर प्रश्न विदेशी वस्तु का बहिष्कार से है, तो निजतावश अपनाए रखना, क्यों? सर, सूचनावेदन तो भेज दिया है, किन्तु गृह मंत्रालय से जवाब अप्राप्त है । शेष के लिए शुक्रिया! मेरा कहना समग्रता को लेकर है! अगर प्रश्न विदेशी वस्तु का बहिष्कार से है, तो निजतावश अपनाए रखना, क्यों?