कविता

मिट्टी का गुल्लक

क्या यह सच है,
भैंस का दूध पीने से
बुद्धि ‘मंद’
अथवा ‘थेथर’ होती है ?
एक देहाती कहावत !
हाँ, हम काले हैं;
काली होती है जैसे चट्टान;
फूटती है जिसके भीतर से;
निर्झर की बेचैन धारा;
जिससे दुनिया की
प्यास बुझती है !
यह खगेन्द्र ठाकुर कहीस!
कुछ मजबूत चीजें
कमजोर घेरे में ही
सुरक्षा पाती हैं;
जैसे- धातुओं के सिक्के
मिट्टी के गुल्लक में ही
सुरक्षा पाती हैं !
सुभाष कामत कहीस !
अगर पुरुष महान हो,
तो उन्हें ‘महापुरुष’ कहेंगे,
महादेव नहीं;
जब महिलाएं ‘महान’ हो,
तब उन्हें हम क्या
‘महामहिला’ कह पाएंगे ?
‘महापुरुष’ शब्द
पर बैन लगना चाहिए,
क्योंकि जब कोई महिलाएं
या स्त्रियाँ
‘महान’ हो जाती हैं,
तब हम उन्हें क्या
यह शब्द कह पाएंगे?
तुम्हें तो
‘पलंग’ भी नसीब है, दोस्त !
मैं तो चार पुख्तों से
पलंग पर नहीं सोया हूँ !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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