कविता

तुम बहरे हो क्या ?

दादाजी कहा करते थे,
‘मनिहारी श्मशान घाट’ की
धूल-धूसरित “जिलेबी” खाने से
भूत-प्रेतों से दोस्ती
‘सीधे’ हो जाती है !
••••
अखबारी कागज पर खाने से
प्रिंटिंग स्याही पेट में जाकर
उत्पात मचाते हैं
और
बवासीर आदि के रूप में
बाहर निकलते हैं ?
••••
कल जो ‘लाई’ (लाड़ू) खाये थे,
अभी तक पचा नहीं है !
माँ से कह दिहिस है,
आज सिर्फ़ सब्ज़ी का
‘झोड़’ सुरकेंगे ?
••••
जिसने प्रसव- वेदना झेलकर
और मुझे खूब रुलाकर,
किन्तु पिता और परिवार को
मुस्कराने का अवसर प्रदान की!
प्यारी माँ को प्रभातीय नमन….
••••
त्रिभुज के तीनों कोण का योग
180° होता है,
पर ‘इलेक्ट्रिक आयरन’ का योग
180° नहीं होता !
यह इलेक्ट्रिक आयरन ही
‘नियोजित शिक्षक’ है?
••••
तुम
बहरे हो क्या ?
सर
कार !
••••
रोपने के लिए क्यों ?
पर कोई रोप के ही
क्या उखाड़ पाए हैं ?

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

Leave a Reply