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ऑनलाइन लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न

 मंडला–भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में, फेसबुक के “अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका ” के  पेज पर, संयोजक सिद्धेश्वर द्वारा आयोजित ऑनलाइन ” हेलो फेसबुक लघुकथा  सम्मेलन ” के तहत, मुख्य अतिथि डॉ संगीता तोमर ने कहा कि – ” इस दौर में जहां टेक्नोलॉजी का व्यापक विकास हो गया है,स्त्रियों की आर्थिक और सामाजिक स्थितियों में भी बदलाव आया है, भूमंडलीकरण और उदारीकरण के बाद समाज में कई बदलाव हुए हैं, ऐसे में लघुकथा सामाजिक जीवन की यथार्थता को उजागर करने में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है!
                इस विधा में जहां एक ओर सटीकता है, वही बाजारवाद के चलते,और  लोगों के पास समय का अभाव होने के कारण,  लघुकथा की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है ! पाखंड, धूर्त अदाओं और सांस्कृतिक प्रदूषण के आगमन के साथ  समाज का जो नैतिक अवमूल्यन हुआ है, लघुकथा उस को उजागर करने में सक्षम है !
            पूरे  ऑनलाइन लघुकथा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए  वरिष्ठ लघुकथाकार प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे,मंडला, मध्य प्रदेश ने कहा कि- “सिद्धेश्वर द्वारा संयोजित  और आंदोलन का रूप  ले चुके, इस ऑनलाइन  लघुकथा सम्मेलन में पढ़ी गई  अधिकांश लघुकथाएं काफी संतोष देती है l युवा पीढ़ी के लघुकथाकारों को मेरा परामर्श है कि वे लघुकथा की विषयवस्तु अपने  सामाजिक जीवन से ले ! साथ ही साथ समकालीन विसंगतियों व विद्रूपताओं को अपनी लघुकथाओं का विषय बनाए। “
                    उन्होंने विस्तार से कहा कि – ” यदि लघुकथा गढ़ने का कार्य, सतर्कता से किया गया है,तो तय है कि लघुकथा पाठक के अंतर्मन पर प्रभाव डालेगी ही !जो लघुकथाकर अपनी लघुकथा से पाठक के विचारों को उद्वेलित करने में,उसे झकझोरने मेें सफल हो जाते है,वही सामाजिक परिवर्तन के काम को गति दे पाते है।”
          इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, वरिष्ठ कथा लेखिका  चित्रा मुद्गल की लघुकथा ” बयान ” की वीडियो प्रस्तुति काफी दर्शकों ने पसंद किया ! उनकी  चर्चित लघुकथा ” बयान ” पर विस्तार से चर्चा करते हुए, संयोजक  सिद्धेश्वर ने कहा कि – ” चित्रा मुद्गल की लघुकथाएं हमारे भीतर की कमजोरियों पर इस प्रकार प्रहार करती है कि हम  मनोवैज्ञानिक रूप से आत्मचिंतन, और वैचारिक मंथन करने के लिए  मजबूर हो जाते हैं ! “
             इस ऑनलाइन  लघुकथा सम्मेलन में, प्रियंका श्रीवास्तव ‘शुभ्र ‘ने ‘हाथी के दांत’/ राजप्रिया रानी ने ‘पवित्र रिश्ता ‘ / रशीद गौरी (राजo) ने ‘  रिपोर्ट ‘/प्रवीण राही (मुरादाबाद) ने ‘ ज्यादा -केयर ‘/प्रो.शरद नारायण खरे (म.प्र.) ने ‘ असली विकलांग ‘/ माधुरी भट्ट ने ‘काश !’ लघुकथाओं का पाठ कियाl
                              इस  ऑनलाइन लघुकथा सम्मेलन में   संयोजक सिद्धेश्वर द्वारा चयनित और वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत  प्रेमचंद, रविंद्रनाथ टैगोर, फलावेयर ( फ्रांसीसी), हेमिंग्वे (अमेरिकी), बर्टोल्ट ब्रेख्त (जर्मन) के साथ -साथ  डॉ कमल चोपड़ा, डॉ सतीशराज पुष्करणा, रामदरश मिश्रा, मार्टिन जॉन, बलराम अग्रवाल, विभा रानी श्रीवास्तव (अमेरिका) की लघुकथाओं को, पांच सौ से अधिक लोगों ने देखा और सराहा l

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