गीत/नवगीत

कर्म छोड़कर निर्भरता की,

शक्ति, धैर्य, प्रेम की देवी, समर्पण तेरी महानता है।
कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है??
नर से सदैव कर्म में आगे।
तुझसे ही नर भाग्य हैं जागे।
नर तेरे बिन सदा अधूरा,
तू सदैव ही आगे-आगे।
प्रतियोगी बनती हो क्यूँ? कैसी आज वाचालता है।
कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है??
कानूनों का जाल ये कैसा?
भरण-पोषण को देता पैसा।
पढ़ी-लिखी समर्थ नारी भी,
कमा न सके, सामर्थ्य ये कैसा?
पिता के घर में करे त्याग, पति पर क्यूँ विकरालता है।
कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है??
कर्म से विमुख रार है करती।
स्वयं क्यों नहीं सक्षम बनती?
निर्भरता नर पर दिखला कर,
नारी जाति का सम्मान हरती।
आक्रामकता से जग पीड़ित, सृजन करे दयालुता है।
कर्म छोड़कर निर्भरता की, ये कैसी समानता है??

परिचय - डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

शिक्षा: एम.ए.(हिन्दी), एम.काम.(लेखा व विधि), एम.काम.(व्यवसाय प्रशासन), एल एल.बी., पी.जी.डी.जे.एम.सी. ,पीएच.डी., एम.एड., विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक पात्रता परीक्षा (नेट) वाणिज्य और शिक्षा में उत्तीर्ण । मेरी ई-बुक: चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो, शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका), आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह), पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा, प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह), सफ़लता का राज़, समय की एजेंसी, दोहा सहस्रावली(1111 दोहे), बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह), मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह), समर्पण(काव्य संग्रह). पता- जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगंज, दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ियाँ, मेघालय-794106, ई-मेलः santoshgaurrashtrapremi@gmail.com, चलवार्ता 09996388169, rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in

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