कविता

मेरा भारत सबसे प्यारा

भारत प्यारा देश हमारा
तन -मन धन,अर्पन करता हूँ,
मातृभूमि के चरणों में मस्तक रख कर
कोटि कोटि अभिनन्दन करता हूँ।

ऋषियों की वाणी देती है प्रेरणा
नदियों का पानी यहां अमृत है,
अनुपम प्यारा देश हमारा
इसके कण कण में है कंचन।

गंगा यमुना भारत माता के हार है
हिमगिरि है भारत माँ का ताज बना,
हम सपूत है भारत माता के
पलते है इसके आंचल में।

कावेरी का जल, पावन है
विन्ध्याचल अति शोभित श्रृंखला,
राजस्थान वीरों की भूमि है
धूली यहां की चन्दन है।

सूदूर दक्षिण भारत का सागर
पद प्रक्षालन में लगा हुआ,
हम सब माता की सन्तानें
पलते है इसके स्नेहिल आंचल में।

मेरा भारत सबसे प्यारा
ये दुनिया में सबसे न्यारा,
प्यार प्रेम की यहां यहां त्रिवेणी
विश्व भर में यह सबसे प्यारा।

भारत मां के लिये यह जीवन दे दूंगा
अपना तन-मन धन, अर्पित कर दूंगा,
जिस मातृभूमि में जन्म लिया है
न्यौछावर कर दूंगा यह जीवन।।

— कालिका प्रसाद सेमवाल

कालिका प्रसाद सेमवाल

प्रवक्ता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, रतूडा़, रुद्रप्रयाग ( उत्तराखण्ड) पिन 246171