स्वास्थ्य

अफवावों से बच कर, विश्वास के साथ मैंने वैक्सीन लगवाई !

आज कल कोरोना वायरस की जंग में विश्व के कुछ देशों समेत हमारे देश में व्यापक स्तर पर टीकाकरण चल रहा है। सरकार के भरपूर इंतज़ाम के बावजूद अनुमानित डॉक्टर और सेहत कर्मियों के पहले चरण में बहुत कम ही टीके लगे है। यही हाल दुसरे चरण में भी देखने को मिल रहा है। आखिर क्या कारण है की लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे ? क्या वजह है की पहले दिनों का उत्साह अब देखने को नहीं मिल रहा ?

हमारे देश में प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के विरुद्ध विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण प्रोग्राम का 16 जनवरी का उत्घाटन किया। टेलीविज़न पर देश के विभिन शहरों में जाने माने डॉक्टरों को सबसे पहले टीके लगाते देख देशवासियों में एक ख़ुशी की लहर, आशा और उम्मीद जागी। सबसे पहले डॉक्टरों समेत अन्य स्वस्थ्य कर्मियों को भारत में ही निर्माणित 2 वैक्सीन्स ,कोवाक्सिन और कविशील्ड से टेके लगने शुरू हो गए।

और फिर सोशल मीडिया पर टीकाकरण के बाद कुछ स्वास्थय कर्मियों को कथित गंभीर साइड इफ़ेक्ट के बाद हॉस्पिटल में दाखिल होना और उनकी मौत की अफवावो से लोगों में भय और आशंकाएं जागने लगी। यहाँ तक की मेरे कुछ डॉक्टर मित्र और स्वास्थय कर्मी ने वैक्सीन लगवाना टाल दिया।

सच पूछों तो इन अफवाहों से मैं भी अछूता नहीं रहा। यहाँ तक की मेरा रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी मैं इस उधेड़ बुन में ही रहा की वैक्सीन लगवाऊ या नहीं। अब साहब ये भय और आशंका तो होना स्वाभाविक भी है और फिर जिस प्रकार से सोशल मीडिया पर वीडियो और चैट आ रहे थे, कोई भी आम आदमी घबरा सकता है। मैं भी पहले इंसान हूँ और बाद में डॉक्टर।

मैंने सोचा, विवेक से काम लिया , वैक्सीन पर माहिर लेख पड़े और अध्ययन किया।

कोई भी टीकाकरण के पश्चात कुछ लोगों में सर दर्द, बुखार, बदन दर्द, कमजोरी और जी मिचलाना जैसे कई मामूली साइड इफ़ेक्ट होते है , पर एक दो दिन में सब कुछ ठीक हो जाता है और फिर उस वयक्ति या बच्चे में उस वायरस या बैक्टीरिया से इम्युनिटी हो जाती है

मैंने इन सोशल मीडिया में वैक्सीन की गुणवन्ता और सुरक्षा पर उठ रहे सवालो को अपने ऊपर हाभी न होने का फैसला किया और हौसले के साथ अपना निर्धारित समय पर स्वास्थय केंद्र पर कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ लगवाई। यकीन मानिये साहिब, कोई साइड इफ़ेक्ट न हुआ।

मुझे अपने वैज्ञानिकों और माहिर डॉक्टरों पर पूर्ण विश्व है जिनोह्णे ने रिकॉर्ड समय में दो कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का निर्माण किया।

अभी तो शुरुआत है, देश भर में सब लोगों को वैक्सीन लगने में कई महीने लग सकते है। ऐसे में तब तक हमे मास्क लगाना और 2 गज़ की दूरी भी बनाये रखना जरूरी है।

कोरोना को हराना है तो अफवावो पर ध्यान न दे। भयमुक्त, आशंकित हो कर, विश्वास और हौसले से वैक्सीन लगवाए।

मैंने तो पहला डोज़ लगवा लिया है , अब मुझे दोस्सरे डोज़ का इंतज़ार है।

– डॉक्टर अश्वनी कुमार मल्होत्रा

परिचय - डॉ अश्वनी कुमार मल्होत्रा

मेरी आयु 66 वर्ष है । मैंने 1980 में रांची यूनीवर्सिटी से एमबीबीएस किया। एक साल की नौकरी के बाद मैंने कुछ निजी अस्पतालों में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम किया। 1983 में मैंने पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज में बतौर मेडिकल ऑफिसर ज्वाइन किया और 2012 में सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद से रिटायर हुआ। रिटायरमेंट के बाद मैनें लुधियाना के ओसवाल अस्पताल में और बाद में एक वृद्धाश्रम में काम किया। मैं विभिन्न प्रकाशनों के लिए अंग्रेजी और हिंदी में लेख लिख रहा हूं, जैसे द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदुस्तान टाइम्स, डेली पोस्ट, टाइम्स ऑफ इंडिया, वॉवन'स एरा ,अलाइव और दैनिक जागरण। मेरे अन्य शौक हैं पढ़ना, संगीत, पर्यटन और डाक टिकट तथा सिक्के और नोटों का संग्रह । अब मैं एक सेवानिवृत्त जीवन जी रहा हूं और लुधियाना में अपनी पत्नी के साथ रह रहा हूं। हमारी दो बेटियों की शादी हो चुकी है।

3 thoughts on “अफवावों से बच कर, विश्वास के साथ मैंने वैक्सीन लगवाई !

  1. आदरणीय डाक्टर साहब, सादर नमन। सबसे पहले तो आपको कोरोना वेक्सीन लगवाने पर बधाई। आपने बताया हमारे देश में प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के विरुद्ध विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण प्रोग्राम का 16 जनवरी का उत्घाटन किया।आपने यह भी पूछा है आखिर क्या कारण है की लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे ? कई देशों में वेक्सीन सबसे पहले वहां के राष्ट्राध्यक्षों ने लगवाई टी वी पर लोगों ने देखा। हमारे देश में ऐसा क्यों नहीं हुआ, क्या प्रधान मंत्री पहले दूसरे लोगों पर इसका प्रभाव देख रहे हैं क्या दूसरों को जान की कोई कीमत नहीं, जब यह लोग ही डर रहे हैं तो जनता तो डरेगी ही। टी वी पर जो साई बाबा सीरियल चल रहा है, आपने देखा कैसे साई बाबा ने बताया की पहले अफसरों को टीका लगवाना चाहिए।

    1. आदरणीय रविंदर जी। आपने सही कहा है की कुछ देशों में नेताओं ने कोरोना वैक्सीन लगवा कर अपने देश की जनता को जो वैक्सीन के प्रति विश्वास का सन्देश दिया है, अच्छा होता अगर हमारे प्रधान मंत्री समेत अन्य नेता भी वैक्सीन सब से पहले लगवाते। सेहत और पुलिस विभाग के आला अफसरों ने लुधिअना में मिसाल कायम कर अपने साथ काम करने वालों को सही वक़्त पर सही सन्देश दिया है फिर भी लोग वैक्सीन के प्रति उदासीन है। आप का बहुत बहुत आभार।

    2. यदि प्रधानमंत्री पहले टीका लगवाते, तो आप ही कहते कि प्रधानमंत्री को अपनी जान की चिन्ता सबसे अधिक है, जनता की जान की चिन्ता नहीं है। वैसे आपको पता होना चाहिए कि भाजपा के कई बड़े नेताओं ने सबसे पहले टीका लगवाया है।

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