सामाजिक

आत्महत्या सिर्फ़ कायरता की सूचक है

कितना छोटा सा शब्द है, ये *आत्महत्या* परंतु बहुत ही भयावह है ये।बहुत से इंसा ऐसे हैं जो सिर्फ़ एक शव देख कर भी डर जाते हैं । तो ऐसे लोगों के लिये आत्महत्या शब्द तो उनके जह़न से कल्पना से भी परे है।सच आज इसी विषय को लिखने का विचार जागा जब पांच अखबारों मे अलग-अलग शहरों मे लोगों द्वारा आत्महत्या करने की खबर सुनी तो मन विचलित हो उठा और इतना छोटा शब्द इतना भयावह सा प्रतित होने लगा।मात्र कल्पना से ही दिल सिहर उठा मेरा भी।कैसे लोग खुद की इतनी बेहतरीन जिंदगी जो भगवान ने जो हमें दी,उसे खत्म कर लेते हैं।कैसे वो इतनी पीढ़ा देते खुद को,जिंदगी की लीला को समाप्त करने के लिये ओह रुह सिहर उठी जब पढ़ा की एक आदमी ने छत से छलांग लगा के खुद को ही खत्म कर डाला। तो एक ने खुद को फांसी लगा ली तो किसी ने जह़र गटक लिया।कैसे लोग खुद को ही ऐसी भयावह पीढ़ा दे सकते हैं।कहते हैं बहुत सी यौनियों से गुज़रने के बाद ही हमें मानव देह प्राप्त होती है।हम इंसा बहुत ही भाग्यशाली हैं कि हमें मानव जन्म मिला और हम ही हैं कि नसीबों से मिले इस मानव देह को ही समाप्त कर लेते हैं।हम इंसानों मे भगवान ने सोचने,समझने की कितनी अधिक क्षमता दी है।हमें प्रकृति का भी उपहार दिया जो हमें हर अवस्था से लड़ने की सीख सदैव सिखाती रहती है।आप एक बार इन पशुओं पर नज़र डालिये देखिये कैसे इनके साथ लोग दुरव्यवहार करते रहते हैं,कैसे इन्हें बात ना मानने पर प्रताड़ित भी किया जाता है।कैसे इन्हें मुंह के माध्यम से खाना,चरना पड़ता है,कैसे ये मानव पर आश्रय रहते हैं।आप अब पशु से हटकर खुद के बारे मे सोचिये की भगवान ने कितना सुंदर जीवन आपको दिया है,साथ ही हर एक वो सुविधाएं उपलब्ध करवाई है जो आपके जीवन को श्रृंगार मय बना देती है।जीवन मे खुशियों का संचार कर देती है हमारे आस पास का माहौल।फिर भी बहुत से लोग खुद को बदनसीब समझते हैं।क्यो?

 क्या आत्महत्या करने से पहले कभी ये सोचते हो कि आपके साथ बहुत से ऐसे लोग हैं जो आपको देख -देख कर ही जी रहे हैं।जो आपकी एक मुस्कुराहट पर जान देते हैं।जो आपसे बहुत उम्मीद लगातें हैं।जो आपसे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं।जिनका एकमात्र सहारा सिर्फ़ आप ही हैं।सब जानते हुए भी आपके द्वारा इतनी बड़ी गलती करना कौन सी बुद्धिमत्ता का परिचय है?क्या आप ये सोचते हैं कि जिन मां-बाप ने रात भर जाग-जाग कर आपका ख्याल रखा,आपको कोई भी तकलीफ़ ना हो ये भी ध्यान रखा साथ ही आपकी उच्च शिक्षा की वो तमाम़ कोशिशों मे खुद को सादे वस्त्र मे रखा परंतु वो आपको भव्यता प्रदान कर।अच्छे से विद्यालय तक भेजते आप ऐसे अपनों के बलिदानों को भुलाते हुए अपनी जीवन की लीला को समाप्त कर लेने का भयावह निर्णय कर लेते हैं।कैसे आप इतने स्वार्थी हो सकते हैं जो सिर्फ़ खुद के स्वार्थ का सोचते हुए अपनों को अथाह दर्द के दाग दिये जाते हो।क्या हक है आपको की आप अपने पीछे अपने मासूम बच्चों को भी भूख से बिलखता मरने के लिये किसके सहारे छोड़ जा रहे हैं?क्या समाज उन्हें जीने देगा शांति से ऐसा लगता है आपको?यदा आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं।कुछ समय की हमदर्दी और सांत्वना के बाद उनसे समाज सौ सवाल करेगा कि आखिर क्यों आपके घर के सदस्य ने इतना बड़ा कदम उठाया?यदि वो परेशान था तो आप लोग उसे समझाते इत्यादि ऐसे अनेकों सवाल उनके अंदर के जख्म़ो को कभी भरने ही नही देंगे।आज कल जीवन को खत्म करना तो जैसे एक खेल सा समझ लिया है सभी ने।

याद हे मुझे आज भी मेरे बचपन का वो वाक्या जब मे बालवाड़ी मे पढ़ने जाती थी वहां हमें दूध/ब्रेड मिलता था मध्येउपरांत तब मात्र मैं पांच से छः बरस.की होंगी।अभी हम दूध/ब्रेड खा ही रहे थे कि एक औरत की करुण रस से भरी आवाज़ कानों मे गूंज उठी,वो चीख-चीख के रो रही थी और पुलिस उसे सांत्वना देते हुए घर की सीढ़ियों से संभालते हुए उतार रही थी।वो मंज़र मुझ मे खौंफ सा पैदा करने लगा था।जब मेरी मां को पता चला की हमारी बालवाड़ी के पास ही किसी घर मे कोई हादसा हुआ है तो वो हमें तुरंत ही बालवाड़ी से लेने को चली आई।बाद मे जब हम बड़े हुए तो मां से सवाल करते की मां क्या हुआ था तब,मां से पता चला बड़े होके कि एक लड़के ने प्यार मे सफल न होने पर खुद को ही खत्म कर डाला।अरे ये ना सोचा की मेरी विधवा मां जो मुझे देख कर मेरे लिये ही सिलाई कर-कर के जी रही थी नौ वर्षों से।अकेली उसने पालके कितने प्यार से मुझे बड़ा किया कितनी उम्मीद थी उस मां को कि अब मेरा बेटा बड़ा हो गया है अब यही मेरा सहारा बन कर मुझे खुशियां देगा।परंतु उसके सभी अरमान अपने बेटे के साथ खत्म से हो गये,वो अकेली रह गई उस वृध्दा अवस्था मे जिस समय उसे अपने बच्चे की जरुरत थी।आज मन मेरा खुद याद कर आंसुओं से भर आया।लिखते-लिखते।तो सोचिये जरा अपनों को आप किस अंधकार,दर्द मे छोड़के जाने का कदम उठा रहे हैं।

परंतु नहीं आज कल के युवा पीढ़ी लड़की या लड़के एक साल या चार साल से जिनको जानते,जिनसे प्यार करते उनके थोड़ा रुसवा होने या दिल टूटने पर खुद को हारा हुआ सा महसूस करते और जिन्हें मात्र कुछ सालों से जानते उनके लिये खुद का जीवन समाप्त कर देते।आखिर क्यों?अरे उन मां बाप का क्या जो अठारह साल ,या उससे अधिक समय  से,जब से आप पैदा हुए तब से लेकर आज तक आपसे प्यार करते नज़र आ रहे थे उनका क्या?क्या उनका प्यार उस लड़के/लड़की से बहुत कम था? क्या जो उनके बारे मे आप एक बार भी नहीं सोचते कि वो कैसे रहेंगे आपके बिना?वो तो खुद निराशा से भरे उस अंधकार मय अंधेरे मे डूब जाऐंगे जहां सिर्फ़ दर्द और यादें ही रह जाऐंगी।कोई भी कदम उठाने से पहले अपनों के बारे मे सोचे

जीवन मे सुख और दुख,आशा और निराशा ऐसे साइकिल के चक्के हैं जो जिंदगी को हर हाल मे बस चलना सिखाते हैं।साइकिल है आखिर रास्ते मे चलते समय कभी गिरेगी भी,कभी लड़खड़ाएगी भी,कभी पंक्चर हो जाऐगी या कभी तो इनके चक्कों मे हवा ही कम हो जाऐगी।तो मेरा सवाल ये है कि क्या आप अपनी साईकिल छोड़ के भाग जाऐंगे या अपनी साईकिल बेच देंगे या कुछ रुपये खर्च कर उसे पुनः सुधार कर फिर इस्तेमाल मे लाऐंगे?है! इस सवाल का जवाब?

यदि यही सवाल मैं भरी भीड़ मे पूछूंगी तो सौ मे से अस्सी प्रतिशत लोगों का जवाब यही होगा कि उसे ठीक करवा के उपयोग मे लाऐंगे,कुछ प्रतिशत ही लोग कहेंगे की साइकिल यदि बहुत ही पुरानी हो गयी है तो उसे बेच कर नवीन लेके आऐंगे।ठीक उसी तरह यह हमारा बहुमूल्य जीवन है जिसमें थोड़ा दोष आ जाऐ तो उसका मतलब ये नहीं की उसे खत्म कर लिया जाऐ।बल्कि जीवन मे अपने दोष को पहचान के उस दोष को सुधारने का प्रयास करते रहना चाहिये।आज ना सही कल ठीक हो जाऐगा दोष,कल ना सही परसों ठीक हो जाऐगा दोष।परंतु एक आशा का दिया सदैव जलाऐ रखना चाहिये दिलो में,कभी हारना नहीं चाहिये हमें।आज नही तो कल एक नया सवेरा भौंर की उज्जवल किरण आपके ऊपर ही प्रकाशवान हो एक अलग बेहतरीन छवि दुनिया के सामने दिखलाऐगी।और आप उस जगमग सूरज की तरह दूसरों को प्रकाशवान कर उनमें नित्य नवीन उर्जा का संचार करते ही रहेंगे।कायरता ना दिखाते हुए किसी भी समस्या को पीठ ना दिखाऐं बल्कि समस्या से ड़ट कर मुकाबला कर,साबित कर दें की मैं भी कुछ हूं।

— वीना आडवानी

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित