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इक्कीसवीं सदी के 251अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकारों में प्रो.शरद नारायण खरे भी शामिल

मंडला–21वीं सदी का सर्वश्रेष्ठ व्यंग्य संचयन जिसमें देश और विदेश के व्यंग्यकारों की 251 रचनाओं का चयन प्रतियोगिता के आधार पर किया गया है ,और जिसका संपादन किया है,सक्रिय व्यंग्यकार डॉ लालित्य ललित व सुपरिचित व्यंग्यकार डॉ राजेश कुमार ने। यह इंडिया नेटबुक्स से प्रकाशित है।जिसके निदेशक डॉ संजीव कुमार हैं।इसमें भारत सहित कुल नौ देशों के व्यंग्यकार हैं।इसमें मंडला के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो.शरद नारायण खरे भी शामिल हैं।जो इसके पहले भी अनेक विशिष्ट साहित्यिक उपलब्धियाँ हासिल कर चुके हैं। इस संकलन में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आधार पर चयनित 251सर्वश्रेष्ठ व्यंग्यकार शामिल हैं।
डॉ राजेश कुमार ने बताया कि इस संकलन को तैयार करने के दौरान मॉरीशस में स्थित विश्व हिंदी सचिवालय ने विश्व को पाँच हिस्सों में बाँटकर अंतरराष्ट्रीय व्यंग्य लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया और हमें उन विजेताओं में से सभी प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले व्यंग्यकारों तथा और भी अन्य विजेताओं की रचनाएँ प्राप्त करके इस संकलन में प्रस्तुत की जा रही हैं।जल्द ही यह अमेज़न व फ़्लिपकार्ट पर उपलब्ध होगा।

परिचय - डाॅ विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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