सामाजिक

एक कड़वा सवाल- क्या मिलना जरूरी है?

आज एक कड़वा सवाल मन मे बहुत बैचेनी सी उत्पन्न कर रहा था।जब कल्पना मात्र से ही मेरी कलम का स्वाद ही कड़वा हो गया तो वो कड़वे और तीखे शब्दों संग मेरे अंतर्मन को क्रोध और कड़वाहट से भरने लगी।इसी क्रोध और कड़वाहट को कम करने के लिये दिल बोला कि वीना आज उड़ेल दे कागज़ों पर इस कलम मे भरी कड़वी और सच्चाई भरे सवाल की स्याही को।मत रोक कलम की कड़वाहट को कलम से निकालने से।बस इसी मन की कशमोकश और दिमाग के युद्ध के अंतरव्दंदों मे फसे दिल ने आखिर कलम चलाने का ही निर्णय लिया।सोचा सच्चाई तो सच्चाई है चाहे वो कड़वी ही क्यों ना हो पर जग को इस सच्चाई के आईने के सामने लाके खड़ा करना ही है और ये कड़वा सवाल है।क्या सगाई और शादी के बीच मिले समय मे एकदूजे से मिलना जरूरी है? बिना मिले हुए शादी के बाद की जिंदगी सफल नहीं होगी क्या?आधुनिक युग के बच्चे कहते हैं कि मिलना,एकदूजे को शादी से पहले जानना और समझना बहुत ही जरुरी है।पर सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों मिलना जरूरी है?पहले भी शादियों हुई हैं लोगों कि और कितनी सफलता से बिन मिले भी रिश्ते कामयाब भी हुए हैं।आप अपने मां बाप से सवाल करिये और पूछिये क्या उनके जमाने मे शादी से पहले मिलने का रिवाज था?क्या वो लोग मिले थे?तो आपको जवाब मिलेगा नहीं बस चिट्ठी पत्री के माध्यम से बात होती थी।उनके समय मे तो फोन भी नहीं हुआ करते थे।यदि एक शहर मे ही रिश्ता हुआ हो तो फिर सबके साथ ही एक दो बार मुश्किल से दूर से देखने का मौका मिल जाता था।बड़ो के डर और सम्मान के भय से ज्यादा मेल मिलाप संभव भी नही था।
परंतु आज के आधुनिक युग के बच्चे तो कुछ ज्यादा ही एडवांस हो चुके हैं वो बड़ो की राय से भी अकसर दो कदम आगे ही चलते रहते हैं और बड़े कुछ बोले तो जवाब देंगे मम्मी/पापा दुनिया बदल गई है आपके जमाने जैसा अब बाहर का माहौल नही है।आप थोड़ा बाहर निकल कर तो देखिये कितनी अधिक आधुनिकता समाई है दुनिया मे।बस बच्चों के मुख से ऐसी बाते सुन मां-बाप खामोश से ठगे से खड़े रह जाते हैं।अब आते हैं पुनः मेरे उठाऐ एक कड़वे सवाल पर..*एक कड़वा सवाल,क्या मिलना जरूरी है*?
आज कल की नवयुवा पीढ़ी अपने भविष्य को सवारने के लिये भरपूर शिक्षा ग्रहण कर रही है और इस तरह विवाह की उम्र निरंतर निकलती जाती है।एक दिन रिश्ता तय भी हो जाता,सगाई भी हो जाती,घर मे खुशी का माहौल बना रहता है।सगाई और शादी के बीच के समय अंतराल मे लड़का और लड़की खुब घूमते साथ मे कभी मूवी,तो कभी कहीं,तो कभी कहीं बस शादी से पहले मिलने का बहाना ढूंढते ही रहते हैं बस।बड़े बहुत समझाते कि इतना मेल मिलाप मत करो पर आधुनिक युग के बच्चे उन्हें नये जमाने का कह कर दुहाई देते साथ ही उन्हें पुराने जमानों की कह कर खिलली उड़ाते।परंतु ये ना सोचते की बड़े जो भी कहते हमारे भले के लिये ही कहते हैं क्यों कि वो चाहे पुराने जमाने के विचार वाले हों पर हम से अधिक दुनिया देखी है उन्हें पता है कि दुनिया की चाल चलन क्या है।हमें अपने बड़ो के व्दारा समझाई जाने वाली बातों को बहुत ही ध्यान से सुनना चाहिये।
आज की नवयुवा पीढ़ी सगाई के बाद मिलती जुलती है और अपने जज़्बातो से नियंत्रण अकसर खो देती है जो दूरियां होनी चाहिये उन दूरियों की सीमा को लांघ कर अपने आप पर काबू नहीं रख पाते हैं जिसके चलते अकसर इनका परिणाम बुरा ही इंसा पाता है।जिससे बहुत बार बाद मे रिश्ता तोड़ने की बात वर पक्ष द्वारा की जाती रही है।ऐसे मे समाज मे बदनामी और हसी का पात्र बनने लगे हैं अब रिश्ते।सच जरा सी लापरवाही के चलते समाज उंगलियां उठाता तो बस लड़की के आचरण पर,लडकों को कोई कुछ ना कहता है।सच संभल जाइये इस तरह के आधुनिकता भरे समाज मे कदम बढ़ाते हुए बहकने से।बहुत कडवी सच्चाई पर सच मिलना जरूरी नहीं है आखिर शादी के बाद मिलना ही सही है।आधुनिकता के पीछे देखा देखी मे ना भागें।
आधुनिक युग हो गया है भाई,लड़के लड़की की हुई सगाई,पहले की परंपरा याद आई,सगाई के सीधे शादी ना कोई ,मिलने की इच्छा बीच मे जताई।मिलना जरूरी है क्या?सगाई हुई नहीं की मिलने की परमपरा चरम सीमा पर पाई,जिसके चलते खुद पर काबू ये युवा पीढ़ी रख ना पाई।नतीजा बुरा हुआ बहुत से रिजल्ट मे कानों से सुन पाई।मिलना जरूरी है क्या?
अब समस्या जटिल सामने खड़ी सोचा होगी बहुत जग हसाई या तो एबार्शन या तो विवाह
की तिथि जल्द निकलवाई।परंतु ऐसे बहुत से लोग देखे जो लड़की को ही बचलन कह रिश्तों की मर्यादा का खिलवाड़ कराई।मिलना जरूरी है क्या?अब देखो लड़की को दोष देंगे सभी क्यों जज़्बातो पर लगाम ना लगाई, क्यों भावों की गंगा मे डूब कलंक पाई,क्यों हमारी तूने नाक इस तरह कटवाई क्यों नहीं डूब के तू अपनी जीवन लीला का अंत कर संदेस भिजवाई।हर खता की सजा सिर्फ़ लड़कियां पाई,लड़कों के पलट जाने पर भी उनहे लड़का कह दुनिया पीठ थपथपाई।
आशा है कि रिश्तों की गरिमा बनाऐ रखने के लिये एक मर्यादा का फासला भी बनाऐ रखेंगे,शादी पवित्र बंधन है इसकी पवित्रता बनाऐ रखें।

— वीना आडवानी

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित