गीत/नवगीत

आकर्षण का समय है बीता

आकर्षण का समय है बीता, विशुद्ध प्रेम की वेला है।
संबंधों का जाल नहीं ये, दिल से दिल का मेला है।।

हम दोनों हैं और न कोई।
जाग्रत प्रेम, वासना सोई।
जिसको जो कहना है कह ले,
आओ, सोयें औढ़ के लोई।
साथ आओ कुछ बातें कर लें, समय गया, जो पेला है।
संबंधों का जाल नहीं ये, दिल से दिल का मेला है।।

संबंधों की, ना मजबूरी।
नर-नारी में कैसी दूरी?
अकेले-अकेले फिरें अधूरे,
मिलकर होती जोड़ी पूरी।
अखरोटों से दाँत हैं टूटे, बैठ खाओ अब केला है।
संबंधों का जाल नहीं ये, दिल से दिल का मेला है।।

प्राकृतिक पूरक, नर और नारी।
मिलकर बोते, सुख की क्यारी।
देशकाल की नहीं है सीमा,
नारी नर से नहीं है न्यारी।
संग-साथ का समय मिले जब, खेलो प्रेम के खेला है।
संबंधों का जाल नहीं ये, दिल से दिल का मेला है।।

परिचय - डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

शिक्षा: एम.ए.(हिन्दी), एम.काम.(लेखा व विधि), एम.काम.(व्यवसाय प्रशासन), एल एल.बी., पी.जी.डी.जे.एम.सी. ,पीएच.डी., एम.एड., विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक पात्रता परीक्षा (नेट) वाणिज्य और शिक्षा में उत्तीर्ण । मेरी ई-बुक: चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो, शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका), आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह), पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा, प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह), सफ़लता का राज़, समय की एजेंसी, दोहा सहस्रावली(1111 दोहे), बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह), मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह), समर्पण(काव्य संग्रह). पता- जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगंज, दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ियाँ, मेघालय-794106, ई-मेलः santoshgaurrashtrapremi@gmail.com, चलवार्ता 09996388169, rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in

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