गीत/नवगीत पद्य साहित्य

समाधान बनकर दिखलाओ

समस्याओं से,  तुम कभी न भागो, सोचो, समझो और गले लगाओ।
किसी से, किसी की, करो न शिकायत, समाधान बनकर दिखलाओ।।

रोते हुए को, कोई न देखे।
सबके अपने-अपने  लेखे।
समय की शिकायत करते हैं जो,
करते रहते, वही  परेखे।
बातों से,  कभी,  काम न होते,  चलो,  चलो और  चलते जाओ।
किसी से, किसी की, करो न शिकायत, समाधान बनकर दिखलाओ।।

उसकी, उससे बातें करते।
समय नष्ट कर, क्यों हो मरते?
अपने आप से, बातें करके,
सिद्ध करो, तुम, नहीं हो डरते।
लीकों पर चल,  कहाँ पहुँचोगे?  तुम बाधाओं से, राह बनाओ।
किसी से, किसी की, करो न शिकायत, समाधान बनकर दिखलाओ।।

विकास के पथ, तुम चलते जाओ।
कहते  हो जो,  कर दिखलाओ।
डर ही, शिकायत, इसकी, उसकी,
कर्म से,  डर को,  दूर भगाओ।
खुद पर, तुम विश्वास करो, फिर, शिखरों पर, तुम चढ़ते जाओ।
किसी से, किसी की, करो न शिकायत, समाधान बनकर दिखलाओ।।

कर्म के पथिक को, कोई न पराया।
निराशा को, पल-पल,  ठुकराया।
कमियों को,  वो, नहीं खोजते,
जिनने खुद को खुद ही बनाया।
मरने की मन,  बात करो ना,  अकेले रहो,  सबको अपनाओ।
किसी से किसी की करो न शिकायत, समाधान बनकर दिखलाओ।।

परिचय - डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

शिक्षा: एम.ए.(हिन्दी), एम.काम.(लेखा व विधि), एम.काम.(व्यवसाय प्रशासन), एल एल.बी., पी.जी.डी.जे.एम.सी. ,पीएच.डी., एम.एड., विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक पात्रता परीक्षा (नेट) वाणिज्य और शिक्षा में उत्तीर्ण । मेरी ई-बुक: चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो, शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका), आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह), पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा, प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह), सफ़लता का राज़, समय की एजेंसी, दोहा सहस्रावली(1111 दोहे), बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह), मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह), समर्पण(काव्य संग्रह). पता- जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगंज, दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ियाँ, मेघालय-794106, ई-मेलः santoshgaurrashtrapremi@gmail.com, चलवार्ता 09996388169, rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in

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