गीत/नवगीत

मन से रंग लगाओ

विकट घड़ी है यारो लेकिन होली खूब मनाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ।

नहीं प्यार से बड़े है दूजे, रंग जगत में प्यारे
हरे-लाल, नीले या पीले, सभी इसी से हारे
भावों की पिचकारी से, सतरंगी जहाँ बनाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ ।1।

दिल ना दुखे किसी भाई, ऐसी होली खेलो
शब्दों के गुब्बारे में भर, प्रेम संदेशे घोलो
प्रीत रंग के गोले भर-भर, सब पर तुम बरसाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ। 2।

मन के रंग बिखरते हैं तो, जग सुंदर होता है
मन के रंग निखरते हैं तो, अपनापन होता है
सूख न जाये मन-पलाश ये, बगिया नयी सजाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ । 3।

ये गुलाल मन का अति हल्का, दूर-दूर तक जाये
तोड़ के सीमायें ये सारी, सबको गले लगाये
धरती – अंबर सराबोर हो, ऐसा रंग उड़ाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ । 4।

मन के हारे हार है भाई! मन के जीते जीत
गूँज रहा है युगों-युगों से, सकल जगत में गीत
मौसम हो बेरंगा इसके, पहले मन रंग जाओ
मन के रंग लगाओ साथी!
मन से रंग लगाओ । 5।

*रंगोत्सव अभिनंदनम्*
🙏🌹शरद सुनेरी🌹🙏

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