विज्ञान

हीरों से बना पूरा ग्रह !

हमारी दुनिया मतलब केवल हमारी धरती पर स्थित इसका पर्यावरण,मौसम,समुद्र,नदियाँ, पहाड़,रेगिस्तान,झीलें,इस पर उपस्थित लाखों तरह के जीव-जंतु,कीट-पतंगे,परिंदे,तितलियाँ, भौंरे और लाखों अन्य सूक्ष्म जीव-जंतु विचित्रताओं और विस्मित कर देने वाले तरह-तरह के अजूबों से भरे हुए हैं,परन्तु आश्चर्यचकित और हतप्रभ कर देनेवाली रचनाएँ और बिस्मित कर देनेवाली घटनाएं हमारी इस धरती से अरबों-खरबों प्रकाश वर्ष दूर सूदूर अंतरिक्ष में अनन्त विस्तारित इस ब्रह्मांड में उपस्थित अरबों आकाश गंगाओं में,जिन्हें अँग्रेजी भाषा में गैलेक्सी कहते हैं,में होती रहतीं हैं। आधुनिकतम् विज्ञान जैसे-जैसे उत्तरोत्तर विकसित होता जा रहा है,वैसे-वैसे अंतरिक्ष के चमत्कृत कर देने वाले इन दृश्यों और रचनाओं के रहस्य से पर्दा उठता जा रहा है। अभी हाल ही में मेलबोर्न स्थित स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों की अगुवाई में जर्मनी,इटली,अमेरिका और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से हमारी धरती से लगभग 4000 प्रकाश वर्ष दूर हमारी ही आकाश गंगा यानि मिल्की वे गैलेक्सी के एक नक्षत्र में एक ऐसे ग्रह की खोज किए हैं जो पूर्णतया हीरे से ही बना हुआ है ! वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह का तापमान 2000 डिग्रीसेल्सियस से भी ज्यादे है,इसके अलावे यह इतना सघन पदार्थ से बना है कि इसका आकार हमारे वृहस्पतिग्रह से छोटा होते हुए भी द्रव्यमान में यह उससे कई गुना अधिक भारी है,जाहिर सी बात है कि इसका गुरुत्व बल और दबाव भी प्रचंड है,इसलिए इस पर स्थित समस्त कार्बन उच्च दबाव व गर्मी की वजह से पूर्णतया हीरे में बदल गया है।

इस हीरे से बने ग्रह की एक और विशेषता है कि यह अपने तारे की परिक्रमा इतनी तेजी से कर रहा है कि यह अपने तारे की परिक्रमा मात्र 18 घंटे की अल्प अवधि में ही कर लेता है,मतलब इसका एक वर्ष मात्र 18 घंटों का होता है,जबकि हमारी पृथ्वी हमारे सूर्य की परिक्रमा 27 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से करने पर भी पूरा एक वर्ष मतलब 365.25 दिन यानि कुल 8766 घंटे का समय ले लेती है,इस हीरे वाले ग्रह की हमारी धरती से इतनी दूरी है कि उसे अंकों में लिख पाना ही संभव नहीं है ! उदाहरणार्थ उसकी दूरी को इस हिसाब से समझ सकते हैं। यथा प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकेंड है,यह प्रकाश इस हीरे वाले ग्रह तक पहुँचने में 4000 वर्ष लगाता है,इस प्रकार हमारी धरती से इस हीरों वाले ग्रह की दूरी मात्र 300000×60×60×24×365×4000 किलोमीटर है ! इसे यूँ समझ लीजिए कि जब मिश्र का पिरामिड 4000 साल पूर्व बन रहा था,उस समय का चला प्रकाश अब जाकर कुछ समय पूर्व इस हीरों वाले ग्रह पर पहुँचा है। इसलिए आज के आधुनिकतम् विज्ञान के पास भी इस बेशकीमती ग्रह तक पहुँचने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं है। इसलिए हम मानव इस हीरों वाले ग्रह के बारे में केवल सोच सकते हैं,उसके हीरों को प्राप्त करने की इच्छा करना केवल कोरी कल्पना या दिवास्वप्न ही है।

— निर्मल कुमार शर्मा,