कविता

अब कैसा है दर्द ?

लो अब मई चला

अगले साल आऊँगा ।

सोम-सोम नहीं,

मंगल लिए ।

दिल है कि मानता नहीं !

शुभम दिवसम मीता ।

अभी कुछ आराम है,

एक डॉक्टर मित्र के

संपर्क में हूँ ।

स्कूटी जाएगी,

तो वहाँ जाऊँगा !

मुझे आप सबों की

चिंता है ।

ठीक से रहेंगे !

क्या मस्त जोक है ?

मैं तो डर ही गया था-

रियली, यू आर द बेस्ट !

अब कैसा है दर्द ?

यहाँ कब आ रहे हैं ?